लेखक– पार्थसारथि थपलियाल
जिज्ञासा
मुकेश कुमार 10 वीं के विद्यार्थी हैं व्हाट्सएप से जिज्ञासा भेजी है, लिखा है- अनुनासिक और अनुस्वार में क्या अंतर है? मुझे हमेशा कन्फ्यूजन रहता है।
समाधान
हिंदी भाषा व्याकरण के अनुसार हिंदी वर्णमाला में 52 अक्षर हैं। ये स्वर अ से लेकर औ तक फिर अयोगवाह ध्वनियां (नासिक्य ध्वनि और विसर्ग) उसके बाद क से लेकर ज्ञ तक व्यंजन, और कुछ मिश्रित ध्वनियां। इसके अलावा कुछ आगत व्यंजन भी हैं, उन्हें जोड़कर यह संख्या 59 हो जाती है।
1.अनुस्वार, 2.अनुनासिक और 3. विसर्ग इनको अयोगवाह ध्वनियां कहते हैं। ये न स्वर हैं और न व्यंजन। स्वर इसलिये नही हैं क्योंकि ये स्वतंत्र नही हैं। जिनके साथ एक दूसरी ध्वनि भी होती है। व्यंजन इसलिए नही होते क्योंकि ये स्वरों के बाद आते हैं। आगे एकदम स्थिति साफ हो जाएगी।
1.अनुस्वार– यह नाक से निकलने वाली ध्वनि है। नासिक्य ध्वनि स्वर के बाद आती है। अनु+स्वर। स्वर के पीछे। इसे उदाहरण से समझें जैसे गंगा। ग एक व्यंजन है। इसमें अ भी छुपा हुआ है। ग हलंत है उसका उच्चारण तब तक आधा ही है जब तक अ स्वर नही लगता। ग का पूरा उच्चारण होने के बाद नासिक्य ध्वनि आती है। हलंत के बिना लिखा ही पूरा व्यंजन होगा। गंगा, हंस, गंदा, पंप, खंभा इसके उदाहरण हैं।
2.अनुनासिक– वह ध्वनि जो स्वर के साथ जोड़कर बोली जाती है। इसकी पहचान है- अ और आ प्रकार के अक्षरों के ऊपर चंद्र बिंदु बनाया जाता है जैसे- हँस, आँख, दाँत, आँत बाँस, चिड़ियाँ, और ऐ, ओ, औ अक्षरों के ऊपर बिंदी लगाई जाती है। जैसे जोंक, टोंक क्योंकि, ओंस आदि। फिर भी संशय हो तो इन शब्दों के उच्चारण को समझें-हंस और हँस।
3.विसर्ग वह ध्वनि जो तत्सम शब्दों में स्वरों के बाद आते हैं इनका उच्चारह के रूप में होता है। जैसे अतः, अक्षरशः, अतः, प्रायः आदि। अनुस्वार और अनुनासिक ध्वनियों की गिनती एक ही मानी जाती है।
‘यदि आपको भी हिंदी शब्दों की व्याख्या व शब्दार्थ की जानकारी चाहिए तो अपना प्रश्न शब्द संदर्भ में पूछ सकते हैं।’