गांधी नेतृत्व का मानसिक दिवालियापन अब पूरी कांग्रेस पार्टी पर हावी: शेखावत

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी पर दी तीखी प्रतिक्रिया

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),गांधी नेतृत्व का मानसिक दिवालियापन अब पूरी कांग्रेस पार्टी पर हावी: शेखावत। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के पिता पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े की अभद्र टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गांधी नेतृत्व का मानसिक दिवालियापन अब पूरी कांग्रेस पार्टी पर हावी है और ऊपर से नीचे तक, सब पर छाया हुआ है।

सोमवार को अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में शेखावत ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में शायद इस तरह की अभद्र टिप्पणियों की किसी के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। यह पहली बार नहीं है, जब उस व्यक्ति ने सनातन के लिए इस तरह की बात की,जिसने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की माता जी के लिए इस तरह की बात की और अब उनके दिवंगत पिता के लिए इस तरह की बात करना यह कांग्रेस पार्टी का मानसिक दिवालियापन तो है ही, साथ ही उनके वर्तमान नेतृत्व का भी मानसिक दिवालियापन है।

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उन्होंने कहा कि जब मैं नेतृत्व कहता हूं तो प्रदेश अध्यक्ष या राष्ट्रीय अध्यक्ष नेतृत्व नहीं होता। कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व हमेशा गांधी परिवार के पास रहता है। मुझे लगता है कि गांधी नेतृत्व का मानसिक दिवालियापन अब पूरी कांग्रेस पार्टी पर हावी है और ऊपर से नीचे तक सब पर छाया हुआ है।

हर लोकतांत्रिक पार्टी का अपना-अपना अधिकार
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हर लोकतांत्रिक पार्टी का अपना-अपना अधिकार है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर राजनीतिक पार्टी का अपना अधिकार है कि वह अपने विषयों को लेकर जनता के बीच जाए। अपना-अपना तरीका है। उन्होंने पहले भी दिल्ली में अराजकता फैलाने की कोशिश की थी,पर मेरा प्रश्न सिर्फ इतना है कि उनको अपना मंतव्य स्पष्ट करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिन कॉकरोचों के ऊपर चढक़र वह बैठे थे,उस आंदोलन में सहभागी बने थे,उन्होंने जो बयान दिए या उनके साथ वामपंथी विचारधारा के संगठनों ने जिस तरह से उनके साथ मिलकर आंदोलन किया था,या जिनके आंदोलन के वह सहयोगी बने थे,वे भारत विरोधी और भारत विभाजन की मानसिकता वाले लोग हैं। ये कहते हैं कि हम बांग्लादेश का धन्यवाद करते हैं।

बांग्लादेश के पथ पर भारत में अराजकता फैलाकर शासन व्यवस्था को बदलना चाहते हैं,या जिन लोगों के साथ मिल कर वह कंधे से कंधा मिला कर आंदोलन कर रहे थे,ऐसे प्रशांत भूषण जैसे लोग कहते हैं कि अब देश के भविष्य का फैसला संसद में नहीं, बल्कि सडक़ पर होगा।