Safety ‘interlock’ shield at Khunkhuna crossing ahead of train arrival

खुनखुना फाटक पर ट्रेन से पहले सुरक्षा का ‘इंटरलॉक’ कवच

-खुनखुना के एलसी-80 पर नई व्यवस्था हुई प्रारंभ
-रोज गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा होगी मजबूत
-चार घंटे में पूरा हुआ काम,पहली ट्रेन रतनगढ़- मेड़ता रोड डेमू सुरक्षित गुजरी

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),खुनखुना फाटक पर ट्रेन से पहले सुरक्षा का ‘इंटरलॉक’ कवच। रोज का सफर…सामने रेलवे ट्रैक…और उसी ट्रैक पर दौड़ती ट्रेन। ऐसे में लेवल क्रॉसिंग से गुजरने वाले हर राहगीर और वाहन चालक की सुरक्षा सबसे अहम होती है। इसी सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल ने डेगाना-रतनगढ़ रेलखंड में खुनखुना स्टेशन के पास स्थित एलसी-80 को आधुनिक इंटरलॉकिंग व्यवस्था से जोड़ कर बड़ा कदम उठाया है।

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नई व्यवस्था शुरू होने से ट्रेन संचालन और फाटक के बीच बेहतर तालमेल रहेगा। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा,जो रोज दुपहिया, कार,ट्रैक्टर या अन्य वाहनों से अथवा पैदल इस फाटक को पार करते हैं।

जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि एलसी-80 आसपास के गांवों के स्थानीय आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है। यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपने काम,स्कूल, बाजार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आवागमन करते हैं।

ऐसे में फाटक की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना केवल रेल संचालन की दृष्टि से ही नहीं,बल्कि स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

ट्रेन और फाटक की स्थिति में बेहतर समन्वय:-
डीआरएम के अनुसार एलसी-80पर इंटरलॉकिंग लागू होने के बाद ट्रेन संचालन और फाटक की स्थिति के बीच बेहतर समन्वय रहेगा। फाटक की व्यवस्था को ट्रेन संचालन की सुरक्षा प्रणाली से जोड़ा गया है,जिससे निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
इंटरलॉकिंग व्यवस्था को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए स्टेशन से अलग निर्बाध विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था भी की गई है।

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डीआरएम ने कहा कि रेलवे की प्राथमिकता सुरक्षित ट्रेन संचालन के साथ लेवल क्रॉसिंग से गुजरने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। तकनीकी व्यवस्थाओं के निरंतर उन्नयन से रेल यात्रियों के साथ आमजन के लिए भी रेल मार्ग को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया जा रहा है।

सिग्नल व्यवस्था में भी बदलाव:-
वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (संकेत व दूरसंचार) अनुपम कुमार ने बताया कि नई इंटरलॉकिंग व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए कुछ सिग्नलों की स्थिति में बदलाव किया गया है। इससे ट्रेन संचालन और समपार फाटक की व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी।

चार घंटे में पूरा किया काम:-
रेलवे की तकनीकी टीम ने मंगलवार को दोपहर 3.15 बजे से शाम 7.15 बजे तक निर्धारित समय में इंटरलॉकिंग का काम पूरा किया। कार्य पूरा होने के बाद रेल यातायात सुरक्षित रूप से बहाल किया गया। इसके बाद इस मार्ग से गुजरने वाली पहली ट्रेन 74828 रतनगढ़-मेड़ता रोड डेमू सुरक्षित रूप से रवाना हुई।

आमजन की सुरक्षा रेलवे की प्राथमिकता:-
रेलवे की इस पहल का असर केवल ट्रेन संचालन तक सीमित नहीं रहेगा। एलसी-80 से रोज गुजरने वाले लोगों के लिए यह फाटक उनके दैनिक जीवन का हिस्सा है। ऐसे में यहां आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था लागू होने से राहगीरों और वाहन चालकों के सुरक्षित आवागमन का भरोसा और मजबूत होगा।

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