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वैदिक परंपरा एवं आयुर्वेद के अनुसार बनाई खीर

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान का शरद पूर्णिमा का आयोजन

जोधपुर,दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा शरद पूर्णिमा पर शिविरों का आयोजन किया गया। शहर के डाली बाई चौराहा के पास चौपासनी गार्डन में 9 अक्टूबर को सायं 8 से प्रातः5 बजे तक शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में भारतीय वैदिक परंपरा के अनुसार आयुर्वेद को ध्यान में रखते हुए खीर बनाकर चांदनी में रखा गया। आयुर्वेद के अनुसार इस दिन चांद से खीर को, बिना किसी धातु से निर्मित पत्र में रख कर,खीर में विशेष आयुर्वेदिक दवाइयों को मिला कर सेवन करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने मिट्टी के पात्रों में लकड़ी की चम्मच का प्रयोग करके देसी गाय के दूध से निर्मित खीर को पकाया और उसमे संस्थान की पंजाब में नूरमहल आश्रम स्तिथ आयुर्वेदिक फार्मेसी में निर्मित दवा का मिश्रण किया। इससे पुरानी खााँसी,दमा, जुकाम,अस्थमा,नज़ला एवं स्वांस के रोगियों को राहत मिलती है।

खीर बनाने के लिए 80 किलो भारतीय देसी गाय साहिवाल का दूध इस्तमाल किया गया जिसमे 7 किलो मिश्री,10 किलो पोहे डाले गए। खीर को पकाने के लिए 25 हंडियों को 12 चूल्हों पर चढ़ाया गया। शुगर के मरीजों के लिए बिना मिश्री वाली खीर का इंतजाम हुआ। इस पूरे कार्यक्रम में संस्थान के जोधपुर शाखा के 60 से 70 कार्यकर्ताओं ने बढ़ चढ़ कर सेवा की।

संस्थान हर साल देश के कई शहरों में शरद पूर्णिमा के शिविर का आयोजन करता है जिसमें बहुत से रोगी जो 20 साल से श्वास के रोगों से ग्रस्त हैं वे संस्थान द्वारा बनाई गई विशेष आयुर्वेदिक दवा मिश्रित खीर को पूर्णतः वैदिक परंपरा के अनुसार ग्रहण करके अपने रोगों से मुक्ति पाते हैं।

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