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चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात…

जी-20 सम्मेलन समापन के बाद फिर से बिगड़ने लगी शहर की सूरत

जोधपुर,शहर के हालात देख कर यह कहावत चरित्रार्थ हो रही है कि चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात..बात यह है कि तीन दिन तक चले जी-20 सम्मेलन की ऐंप्लायमैंट वर्किंग ग्रुप की बैठक के लिए शहर को एक महीने से सजाया जा रहा था। जिस रूट से जी-20 देशों के प्रतिनिधि गुजरे उस जगह पर रंग रोगन और साफ सफाई का विशेष फोकस किया गया। परकोटा शहर का हैरिटेज वॉक देखने लायक था लेकिन मेहमानों के जाते ही जोधपुर शहर उसी पुराने ढर्रे पर आ गया है। हैरिटेज लुक के लिए लगाए गए कई हैंडीक्राफ्ट के उत्पाद और की गई सजावट अगले ही दिन हटा लिए गए।

डिवाइडर सुधारे मगर सोजती गेट की हालत आज भी बदतर

शहर की प्रमुख सडक़ों के डिवाइडर भी इस जी-20 सम्मेलन की तैयारी को देखते हुए सुधारे गए। नई सडक़ पर हैरिटेज पत्थरों का डिवाइडर बनाया गया तो सर्किट हाउस रोड पर लगी पुरानी जालियां हटाकर नया डिवाइडर बनाया गया। लेकिन सोजती गेट जहां सबसे यातायात का दबाव रहता है,वहां पिछले कई साल से टूटा हुआ डिवाइडर और उसकी जालिया सडक़ पर बिखरी हुई हैं जिस पर कोई ध्यान तक नहीं दे रहा।

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फिर से हैरिटेज वॉक पर कीचड़ और गंदगी

घंटाघर से लेकर तूरजी का झालरा और ब्लू सिटी में जहां हेरिटेज वॉक विदेशी पावणा को करवाई गई थी वहां अब वाटर सप्लाई के दिन कीचड़ का जमावड़ा फिर से लगने लगा है। जिस दिन हैरिटेज वॉक हुई उस दिन पानी की सप्लाई भी देरी से की गई। क्योंकि परकोटा शहर में जिस दिन पेयजल सप्लाई होती है उस दिन सीवरेज लाइन के ओवरफ्लो होने और सडक़ों पर पानी बहने का सिलसिला आम है।

अगले ही दिन हटाए हैंडीक्राफ्ट मॉन्यूमेंट

घंटाघर से लेकर तूरजी का झालरा तक हैरिटेज वॉक को आकर्षक बनाने के लिए कई हैंडीक्राफ्ट मॉन्युमेंट लगाए गए। इसमें हिरण,हाथी,घोड़े के मेटल के बने और लकड़ी के उत्पाद प्रमुख थे। यह स्थानीय लोगों को भी काफी पसंद आए लेकिन अगले ही दिन इनको हटा लिया गया। घंटाघर परिसर में ही अस्थाई टेंट लगाकर बैठक व्यवस्था भी की गई थी लेकिन उसे भी हटा दिया गया है।

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