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श्रीराम की खास विशेषता उनके मर्यादा पुरुषोत्तम वाले स्वरूप में है-मुरलीधर

जोधपुर, सूरसागर कृष्णा वाटिका में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन मानस मर्मज्ञ संत मुरलीधर ने गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस के बालकांड में वर्णित जगत जननी मां सीता जी के स्वयंवर प्रसंग के तहत पुष्प वाटिका प्रसंग व धनुष भंग प्रसंग को बड़े ही ओज व माधुर्य भाव से सुनाया। प्रसंग के अनुसार कहा कि श्रीराम की खास विशेषता उनके मर्यादा पुरुषोत्तम वाले स्वरूप में है।

जीवन के हर क्षेत्र में वे अपनी मर्यादाओं में बंधे हुए हैं। उनका कहीं भी उल्लंघन नहीं करते। कहीं भी उनका निजी हित या स्वार्थ उन पर हावी नहीं होता। वे पूर्णत: अपने समाज और देश के प्रति समर्पित हैं। इसीलिए वे रघुकुल के भूषण हैं। समाज के लिए आदर्श और अनुकरणीय हैं। जन-जन के हृदय में भगवान के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनके साथ एक युग यानी त्रेता युग की समाप्ति होती है।

त्रेता युग के चौथे चरण में श्रीराम का जन्म हुआ था। श्रीराम का संपूर्ण जीवन उनके वीतरागी स्वभाव तथा मर्यादित पुरुष का प्रतीक है। राजा जनक की सभा में वे शिव धनुष को उठाने और भंग करने में कोई उत्सुकता या व्यग्रता नहीं दिखाते। जब राजा जनक पृथ्वी को वीरविहीन बताने लगते हैं, तभी वे विधि द्वारा सृजित पृथ्वी का सम्मान बनाए रखने के लिए आगे बढ़ते हैं और महर्षि विश्वामित्र के निर्देश पर अपने कर्तव्य का पालन करते हैं। पर यह असाधारण कार्य करने पर भी उनके मन में लेशमात्र भी अहंकार नहीं आता। महर्षि परशुराम के क्रुद्ध स्वरूप को देखकर भी वे आवेश में नहीं आते। बड़ों के प्रति सम्मान की भावना में वे तब भी बंधे रहते हैं। लक्ष्मण के आवेश में आने पर उन्हें भी रोकते हैं और अंत में अपने वाक्चातुर्य और विनम्रता के आधार पर ही वे विजय स्वरूप महर्षि परशुराम का स्नेह प्राप्त करते हैं।

कलियुग में भगवान राम का चरित सुनने से व्यक्ति के जीवन की व्यथा मिटती है तथा व्यक्ति कलि के विकारों से मुक्त होकर परम धाम की ओर प्रस्थान करता है।रामचरित मानस की सुंदर पंक्तियां सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध नजर आए। कथा का शुभांरभ आयोजक पूर्व महापौर राजेन्द्र कुमार गहलोत व रमा गहलोत ने मानस पूजन कर किया। इस अवसर पर राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह सोलंकी,ओबीसी मोर्चा भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रस पाल शर्मा,राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक गंगा विशन,विहिप विद्या भारती के माधव सिंह,गजेंद्र सिंह,विहिप प्रांत सहमंत्री महेंद्र सिंह राजपुरोहित,दुर्गा सिंह गहलोत सहित विभिन्न मानस प्रेमी उपास्थित थे।

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