30 करोड़ के धोखाधड़ी केस में विक्रम भट्ट की पत्नी की याचिका खारिज

चलेगा क्रिमिनल केस

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),30 करोड़ के धोखाधड़ी केस में विक्रम भट्ट की पत्नी की याचिका खारिज। राजस्थान हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माण के नाम पर 30 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के चर्चित मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायाधीश फरजंद अली की अदालत ने बॉलीवुड के चर्चित फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी भट्ट की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पहले से पारित अंतिम आदेश में मूलभूत संशोधन नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद श्वेतांबरी और विक्रम भट्ट के खिलाफ आपराधिक मामला ही चलेगा।

एटीएम पर युवक के रुपए अटके फ्रॉड का शिकार

मामले में याचिकाकर्ता ने 19 मार्च 2026 को हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश में संशोधन की मांग की थी। उनका तर्क था कि पक्षकारों के बीच हुआ लेन-देन मूल रूप से दीवानी प्रकृति का था, इसलिए आपराधिक कार्यवाही जारी नहीं रहनी चाहिए। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा पहले ही रिट याचिका की सुनवाई के दौरान उठ चुका है और उस पर विचार के बाद 19 मार्च का अंतिम आदेश पारित किया जा चुका है।

न्यायालय ने कहा कि एक बार आपराधिक अदालत द्वारा अंतिम आदेश पारित कर दिए जाने के बाद वह सामान्य तौर पर उसी आदेश के गुण-दोष की समीक्षा या उसमें बदलाव नहीं कर सकती। अंतिम आदेश में हस्तक्षेप की गुंजाइश कानून में निर्धारित सीमित परिस्थितियों तक ही है, जैसे लिपिकीय या अंकगणितीय त्रुटि को ठीक करना।

आदेश में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 403 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि हस्ताक्षरित निर्णय को सामान्य तौर पर बदला या उसकी समीक्षा नहीं की जा सकती,सिवाय कानून में अनुमत सीमित परिस्थितियों के।

त्रुटि नहीं पाई,आवेदन गुणहीन
अदालत ने पाया कि वर्तमान आवेदन में 19 मार्च के आदेश में किसी लिपिकीय,अंकगणितीय या आकस्मिक त्रुटि की ओर इशारा नहीं किया गया है। इसके बजाय आवेदन के जरिए पहले से दर्ज निष्कर्षों में मूलभूत बदलाव की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने इसे अंतिम न्यायिक आदेश की समीक्षा के समान मानते हुए आवेदन को गुणहीन बताकर खारिज कर दिया। इसी आदेश में शिकायतकर्ता डॉ.अजय मुर्डिया के एक अन्य आवेदन पर भी फैसला हुआ।

शिकायतकर्ता ने खुद को रिट याचिका में प्रतिवादी नंबर छह के रूप में शामिल करने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि संबंधित रिट याचिका पहले ही 19 मार्च 2026 को अंतिम रूप से तय हो चुकी है। ऐसे में समाप्त हो चुकी कार्यवाही में बाद में किसी व्यक्ति को पक्षकार बनाने का आवेदन विचारणीय नहीं रह जाता।

हाईकोर्ट ने इस आवेदन को निष्प्रभावी बताकर खारिज कर दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि इस आदेश से शिकायतकर्ता के कानून के तहत उपलब्ध स्वतंत्र अधिकारों या वैकल्पिक उपचार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। दोनों आवेदन इसी के साथ निस्तारित कर दिए गए।