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निलम्बन आदेश पर उच्च न्यायालय की रोक

नगर पालिका मण्डल देशनोक बीकानेर का मामला

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),निलम्बन आदेश पर उच्च न्यायालय की रोक। राजस्थान उच्च न्यायालय की एकल पीठ के न्यायाधीश कुलदीप माथुर ने लिडिंग फायर मेन (टिण्डल) के निलम्बन आदेश पर रोक लगाते हुए स्वायत शासन विभाग व अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका देशनोक जिला बीकानेर को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है।

सुरेन्द्र सिंह जो वर्तमान में नगर पालिका देशनोक जिला बीकानेर में टिण्डल/लिडिंग फायर मैन के पद पर कार्यरत है, उसकी नियुक्ति नगर पालिका मण्डल देशनोक के द्वारा 25 फरवरी 2014 को हुई थी। नगर पालिका मण्डल द्वारा ही उसकी सेवाएं 12 जून 2016 के आदेश से परिवीक्षाकाल समाप्त होने पर 2 वर्ष पश्चात् स्थायी की गयी।

नगर पालिका मण्डल देशनोक के आम सभा में प्रस्ताव पारित करने के पश्चात् ही उसको 05 जुलाई 2019 के आदेश से पदोन्नति टिण्डल के पद पर प्रदान की गयी। पदोन्नति तथा उसकी नियुक्ति नगर पालिका के आम सभा में पस्ताव पारित होने के पश्चात् ही की गयी थी।

अधिशाषी अधिकारी नगरपालिका देशनोक ने अपने आदेश 23 सितंबर 2026 के आदेश से उसको राजस्थान असैनिक सेवा (वर्गीकरण,नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 13 के तहत निलम्बित कर दिया गया। निलम्बन आदेश में यह भी स्पष्ट रूप से अंकित किया गया कि इस आदेश को पारित करने से पूर्व सक्षम स्वीकृति ली गयी है।

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निलंबन आदेश 23 सितंबर 2026 से व्यथित होकर अपीलार्थी ने एक रिट याचिका अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। उच्च न्यायालय के समक्ष अधिवक्ता का यह तर्क था कि प्रार्थी निलम्बन असक्षम अधिकारी द्वारा किया गया है।

राजस्थान मुंसिपल (अधीनस्थ एवं मंत्रलायिक सेवा) नियम 1963 के नियम 23 के अनुसार याची की नियुक्ति मुंसिपल बोर्ड द्वारा की गयी है तथा उसे टिण्डल पद पर पदोन्नति भी मुंसिपल बोर्ड द्वारा आम सभा में प्रस्ताव पारित करने के उपरांत की गयी है। जबकि उसको निलम्बन संबंधी प्रस्ताव मुंसिपल बोर्ड की आम सभा में पारित किये बिना ही अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका देशनोक द्वारा जारी किया गया है जो प्रार्थी के लिये सक्षम अधिकारी नहीं है।

राजस्थान असैनिक सेवा (वर्गीकरण,नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 13 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी कर्मचारी को निलम्बित उसका सक्षम अधिकारी अथवा नियुक्ति अधिकारी ही कर सकता है। जबकि प्रार्थी को निलम्बित अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका देशनोक द्वारा किया गया जो प्रार्थी का न तो नियुक्ति अधिकारी है न ही सक्षम अधिकारी/प्रार्थी को नियुक्ति व पदोन्नति मुंसिपल बोर्ड देशनोक द्वारा आम सभा में प्रस्ताव पारित करने के पश्चात् प्रदान की गयी जबकि निलम्बन आदेश पारित करने से पूर्व मुंसिपल बोर्ड की आम सभा में कोई प्रस्ताव निलम्बन सम्बन्धी पारित ही नहीं किया गया।

प्रार्थी के अधिवक्ता का आगे यह भी तर्क था कि निलम्बन आदेश में अधिशाषी अधिकारी द्वारा यह भी अंकित किया है कि सक्षम स्वीकृति उपरांत ही निलम्बन आदेश पारित किया गया है यानि वह सक्षम नहीं है यह वह स्वयं ने भी स्वीकार किया है।

आदेश सक्षम अधिकारी द्वारा ही पारित होना चाहिये न कि उसकी स्वीकृति पश्चात। प्रार्थी के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए न्यायाधीश ने प्रार्थी की रिट याचिका को अंतरिम रूप से ग्राहय करते हुए निलम्बन आदेश दिनांक 23 सितंबर 2026 पर रोक लगायी व मुंसिपल बोर्ड देशनोक व स्वायत शासन विभाग का नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।