High Court orders immediate halt to new illegal construction in 17 graveyards.

दिव्यांग अभ्यर्थी को एमबीबीएस के लिए अयोग्य बताने से पहले बतानी होगी कार्यात्मक कमी

राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),दिव्यांग अभ्यर्थी को एमबीबीएस के लिए अयोग्य बताने से पहले बतानी होगी कार्यात्मक कमी। राजस्थान हाईकोर्ट ने बाएं हाथ के जन्मजात विकार के आधार पर एमबीबीएस स्टूडेंट को मेडिकल शिक्षा के लिए अयोग्य घोषित करने वाली मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट खारिज कर दी है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि केवल दिव्यांगता या शारीरिक विकार के आधार पर किसी स्टूडेंट को एमबीबीएस कोर्स के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। मेडिकल बोर्ड को यह स्पष्ट करना होगा कि छात्र में कौन-सी विशिष्ट कार्यात्मक कमी है और वह कमी मेडिकल कोर्स पूरा करने में किस तरह बाधा बनती है।

जस्टिस नूपुर भाटी की पीठ ने कहा कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि याचिका कर्ता कौन सा विशिष्ट कार्य करने में सक्षम नहीं है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि उसके बाएं ऊपरी अंग की विकृति एमबीबीएस की पढ़ाई और प्रशिक्षण में किस तरह बाधा डालती है। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में सहायक उपकरणों और उचित सुविधाओं के माध्यम से स्टूडेंट को कोर्स पूरा करने की संभावनाओं का भी आकलन नहीं किया गया।

इसके अलावा स्टूडेंट के दाहिने हाथ की कार्य क्षमता को भी ध्यान में नहीं रखा गया,जबकि उसका प्रमुख हाथ दाहिना था और वह पूरी तरह सक्षम था।

यह है मामला
मामला वर्ष 2023 की नीट-यूजी परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा के बाद याचिकाकर्ता को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया। इसके बाद मेडिकल बोर्ड ने उसका दोबारा परीक्षण किया और बाएं ऊपरी अंग में विकृति का हवाला देते हुए उसे मेडिकल कोर्स के लिए अयोग्य बता दिया। याचिकाकर्ता ने इस रिपोर्ट को चुनौती देते हुए कहा कि मेडिकल बोर्ड ने उसकी किसी विशिष्ट कार्यात्मक कमी की पहचान नहीं की और न ही यह बताया कि उसकी दिव्यांगता एमबीबीएस कोर्स करने में किस तरह बाधा पैदा करती है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि वह एमबीबीएस कोर्स के थर्ड ईयर में पढ़ रहा है और पहले दो वर्ष की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों परीक्षाएं सफलता पूर्वक पास कर चुका है। हाईकोर्ट ने मामले में सुप्रीम कोर्ट के ओंकार रामचंद्र गौड़ बनाम भारत संघ के फैसले का भी उल्लेख किया।

अदालत ने कहा कि दिव्यांगता संबंधी मेडिकल बोर्ड को सकारात्मक रूप से यह तय करना होगा कि अभ्यर्थी की दिव्यांगता संबंधित पाठ्यक्रम करने में बाधा बनेगी या नहीं। यदि बोर्ड का निष्कर्ष यह है कि अभ्यर्थी पाठ्यक्रम करने में सक्षम नहीं है,तो उसे ठोस कारण बताते हुए यह स्पष्ट करना होगा कि दिव्यांगता किस तरह और किस सीमा तक उसके लिए बाधा है।

जस्टिस नूपुर भाटी ने कहा कि मौजूदा मामले में मेडिकल बोर्ड ने ऐसा कोई कारण नहीं दिया। बोर्ड ने केवल विकार का उल्लेख करते हुए स्टूडेंट को अयोग्य घोषित कर दिया। रिपोर्ट में स्टूडेंट की वास्तविक कार्यक्षमता और एमबीबीएस कोर्स की आवश्यकताओं के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को एमबीबीएस कोर्स जारी रखने के लिए पात्र माना और उसके खिलाफ मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी अयोग्यता के निष्कर्ष को राहत प्रदान की।