High Court orders immediate halt to new illegal construction in 17 graveyards.

75 वर्षीय सजायाफ्ता आरोपी को हाईकोर्ट से राहत

अपील लंबित रहने तक 10 वर्ष की सजा निलंबित

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),75 वर्षीय सजायाफ्ता आरोपी को हाईकोर्ट से राहत। राजस्थान उच्च न्यायालय ने 75 वर्षीय सजायाफ्ता आरोपी प्रताप सिंह को राहत देते हुए अपील के अंतिम निस्तारण तक उसकी 10 वर्ष की सजा निलंबित कर दी है। न्यायमूर्ति फरजंद अली की अदालत ने यह आदेश पारित करते हुए निर्धारित शर्तों पर आरोपी को जमानत पर रिहा करने के निर्देश दिए।

स्मार्ट तकनीक विकसित कर रही आईआईटी जोधपुर की सॉफ्टवेयर नवाचार प्रयोगशाला

प्रकरण में उदयपुर स्थित विशेष न्यायालय,एससी/एसटी(अत्याचारनिवारण) अधिनियम ने 25 फरवरी 2025 को प्रताप सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 द्वितीय के तहत दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया था। इस निर्णय के विरुद्ध प्रताप सिंह की अपील राजस्थान उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। आरोपी की ओर से अधिवक्ता रज़ाक खान एवं अधिवक्ता अफसाना शाह ने सजा निलंबन की अर्जी पर पक्ष रखते हुए न्यायालय को बताया कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक अभिरक्षा में है तथा उसकी आयु करीब 75 वर्ष है।

अपील के अंतिम निस्तारण में समय लगने की संभावना को देखते हुए सजा निलंबित करने का आग्रह किया गया। बचाव पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का भी हवाला दिया। उच्च न्यायालय ने आरोपी की अधिक आयु, लंबे समय से न्यायिक अभिरक्षा में रहने,अपील के निस्तारण में संभावित देरी तथा मामले की अन्य परिस्थितियों पर विचार किया। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया यह भी माना कि घटना अचानक हुए विवाद के दौरान घटित हुई प्रतीत होती है और मामले में अपील के दौरान विचार किए जाने योग्य महत्वपूर्ण प्रश्न मौजूद हैं। सभी परिस्थितियों को देखते हुए उच्च न्यायालय ने सजा निलंबन की अर्जी स्वीकार करते हुए प्रताप सिंह की मूल सजा को अपील के अंतिम निर्णय तक निलंबित कर दिया।

न्यायालय ने 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके तथा 25-25 हजार रुपये की दो जमानतें प्रस्तुत करने पर उसे रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने रिहाई के साथ आरोपी को प्रत्येक वर्ष जनवरी माह में संबंधित विचारण न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने सहित अन्य आवश्यक शर्तों का पालन करने के निर्देश भी दिए हैं। हालांकि, उच्च न्यायालय का यह आदेश आरोपी को दोषमुक्त करने का आदेश नहीं है। निचली अदालत द्वारा की गई दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील अभी विचाराधीन है और मामले के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय अपील के निस्तारण के समय होगा। आरोपी की ओर से पैरवी अधिवक्ता रज़ाक खान एवं अधिवक्ता अफसाना शाह ने की।

Related posts: