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तीसरा बच्चा होने पर भी सरकारी महिला कर्मचारी को मिलेगी मैटरनिटी लीव

राजस्थान हाईकोर्ट का मैटरनिटी लीव को लेकर महत्वपूर्ण फैसला

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज), राजस्थान हाईकोर्ट ने मैटरनिटी लीव को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए एक महिला सरकारी कर्मचारी को तीसरे बच्चे के जन्म पर भी मैटरनिटी लीव देने का रास्ता साफ कर दिया है। हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को महिला के आवेदन पर आदेश की कॉपी मिलने के एक सप्ताह के अंदर उचित फैसला लेने का आदेश दिया है।

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हाईकोर्ट ने साफ किया कि किसी महिला सरकारी कर्मचारी को केवल इस आधार पर मैटरनिटी लीव से वंचित नहीं किया जा सकता कि जिस बच्चे के लिए वह छुट्टी मांग रही है,वह उसका तीसरा बच्चा है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर महिला ने अपनी पूरी सरकारी सेवा के दौरान इससे पहले केवल एक बार मैटरनिटी लीव ली है, तो तीसरे बच्चे के जन्म के बाद मांगी गई दूसरी मैटरनिटी लीव को सिर्फ बच्चों की कुल संख्या के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।

जस्टिस रेखा बोराणा ने सरकारी स्कूल शिक्षिका चंद्रकांता पहाडिय़ा की याचिका मंजूर करते हुए शिक्षा विभाग को मैटरनिटी लीव देने के लिए उचित आदेश जारी करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि मैटरनिटी लीव के अधिकार को सिर्फ बच्चों की संख्या के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2025 के के.उमादेवी फैसले का भी सहारा लिया,जिसमें मैटरनिटी लीव के नियमों को उनके सामाजिक उद्देश्य को ध्यान में रखकर समझने पर जोर दिया गया था।

यह है पूरा मामला
चंद्र कांता पाहाडिय़ा सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। उनकी पहली शादी 25 मार्च 1999 को हुई थी। इस शादी से 7 सितंबर 2000 को उनकी पहली संतान हुई। उस समय वह सरकारी नौकरी में नहीं थीं। इसके बाद वर्ष 2005 में उनकी सरकारी शिक्षक के तौर पर नियुक्ति हुई। सरकारी सेवा में आने के बाद 8 अक्टूबर 2005 को उन्होंने दूसरी संतान को जन्म दिया। इस दौरान उन्होंने मैटरनिटी लीव ली थी। यानी सरकारी नौकरी के दौरान यह उनकी पहली मैटरनिटी लीव थी। बाद में उनकी पहली शादी खत्म हो गई। वर्ष 2015 में उनका पहले पति से तलाक हो गया।

दिसंबर 2023 में उन्होंने दूसरी शादी की। इस विवाह से 20 जून 2026 को उनके बच्चे का जन्म हुआ। इसके बाद उन्होंने शिक्षा विभाग से मैटरनिटी लीव के लिए आवेदन किया और यही से विवाद की शुरुआत हुई। शिक्षा विभाग ने महिला का मैटरनिटी लीव का आवेदन मंजूर नहीं किया। विभाग की दलील थी कि महिला के दो बच्चों की जानकारी पहले से उसके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज है। अब पैदा हुआ बच्चा उसका तीसरा बच्चा है। इसी आधार पर उसे मैटरनिटी लीव देने से इनकार कर दिया गया। महिला ने विभाग के इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी।

कोर्ट ने बच्चों की संख्या नहीं,लीव का रिकॉर्ड देखा
हाईकोर्ट ने महिला की पूरी स्थिति और सरकारी सेवा के दौरान ली गई मैटरनिटी लीव को ध्यान में रखा। महिला की पहली संतान का जन्म सरकारी नौकरी में आने से पहले हुआ था। इसके बाद सरकारी सेवा के दौरान दूसरी संतान के जन्म पर उन्होंने पहली बार मैटरनिटी लीव ली थी। अब दूसरी शादी से हुए बच्चे के जन्म पर वह सेवा के दौरान दूसरी बार मैटरनिटी लीव मांग रही थीं। यानी ऐसा नहीं था कि उन्होंने सरकारी नौकरी में रहते हुए पहले ही दो बार मैटरनिटी लीव का लाभ लिया था।

हाईकोर्ट ने इसी अंतर को अहम माना। उसने कहा कि महिला के मामले को सिर्फ इस आधार पर नहीं देखा जा सकता कि यह उसकी तीसरी संतान है। यह भी देखना जरूरी है कि सरकारी सेवा के दौरान उसने पहले कितनी बार मैटरनिटी लीव ली है।