विश्व प्रसिद्ध रावणहत्था को मिला जीआई टैग

प्रदेश के लिए गौरव का क्षण

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),विश्व प्रसिद्ध रावणहत्था को मिला जीआई टैग। राजस्थान की समृद्ध लोक- सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। विश्व प्रसिद्ध लोक वाद्ययंत्र रावणहत्था को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है। इसे राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर और लोक कलाकारों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

जीआई मैन ऑफ इंडिया के नाम से विख्यात पद्मश्री डॉ.रजनी कांत ने बताया कि जीआई रजिस्ट्री,चेन्नई द्वारा जारी सूची के अनुसार राजस्थान के पारंपरिक वाद्य यंत्र रावणहत्था को आधिकारिक रूप से जीआई टैग प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर जन कल्याण सेवा संस्थान के सहयोग,संस्थान की अध्यक्ष साजिदा रहमान, सचिव वसीम खान, कारीगर मगलाराम तथा डॉ.रजनी कांत के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

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डॉ.रजनी कांत ने बताया कि रावणहत्था को जीआई टैग मिलने से राजस्थान के पारंपरिक शिल्प,लोक कला एवं सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे पहले जोधपुर बंधेज को भी जीआई टैग प्राप्त हो चुका है तथा जोधपुर क्षेत्र के पांच अन्य उत्पाद वर्तमान में जीआई पंजीकरण प्रक्रिया में शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि काशी जीआई मॉडल आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। वर्तमान में काशी क्षेत्र के 32 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त है और इसी मॉडल को राजस्थान में भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।

डॉ.रजनी कांत के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में उनके तकनीकी सहयोग से ऐतिहासिक रूप से लद्दाख में 8, झारखंड में 8,मध्य प्रदेश में 22 तथा बिहार, त्रिपुरा,छत्तीसगढ़,हिमाचल प्रदेश और असम सहित विभिन्न राज्यों के कुल 84 उत्पादों को जीआई पंजीकरण प्राप्त हुआ है।
एक वर्ष के भीतर 215 नए आवेदन भी प्रस्तुत किए गए हैं,जिनमें राजस्थान के 15 उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों की जीआई सुनवाई भी पूरी हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत,लोकल फॉर ग्लोबल तथा एक जिला एक उत्पाद (ODOP) जैसी योजनाओं को मजबूत बनाने के लिए उत्पादों को कानूनी संरक्षण प्रदान करने हेतु जीआई टैग दिलाने का अभियान चलाया जा रहा है। राजस्थान सरकार के सहयोग से प्रदेश के अनेक पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग दिलाने की दिशा में व्यापक कार्य किया जा रहा है।

डॉ.रजनी कांत ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान को जीआई टैग की बड़ी सौगात मिलने वाली है। इससे प्रदेश के लाखों शिल्पकारों, बुनकरों,महिलाओं, किसानों,कारीगरों और उद्यमियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने बताया कि इस दिशा में भारत सरकार के एमएसएमई विभाग, राज्य सरकार तथा नाबार्ड का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

रावणहत्था को जीआई टैग मिलना न केवल राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर सशक्त करेगा,बल्कि लोक कलाकारों और पारंपरिक वाद्य निर्माण से जुड़े कारीगरों के लिए नए आर्थिक अवसर भी सृजित करेगा।