सात माह की बच्ची को उमेद अस्पताल में मिला नया जीवन

सात माह की बच्ची को उमेद अस्पताल में मिला नया जीवन

जोधपुर,सात माह की बच्ची को उमेद अस्पताल में मिला नया जीवन। उमेद अस्पताल में सात माह से कम अवधि में समय से पहले जन्मी एक बच्ची को यहां के डॉक्टरों और नर्सेज की मेहनत से नया जीवन मिला है। अस्पताल की नर्सरी के प्रभारी और आचार्य डॉ जेपी सोनी ने बताया कि 17 नवंबर को 28 से भी कम सप्ताह की इस बच्ची के जन्म लेने के तुरंत बाद नर्सरी में लाया गया था जिसका वजन महज 750 ग्राम था। जन्म के तुरंत बाद अस्पताल की नर्सरी के इंक्यूबेटर,वार्मर में रही। नर्सरी में लंग्स सोनोग्राफी की जिसमें पता चला कि बहुत ज्यादा कमजोर है। संक्रमण रोकने के लिए इंजेक्शन दिया गया एवं ईको किया गया,दिमाग की सोनोग्राफी में भी परेशानी सामने आई तो उसका उपचार दिया गया। तीन दिन तक वेंटीलेटर पर रखा गया। तीन दिन बाद सीपेप पर रखा गया। 14 वें दिन एंटीबायोटिक बंद की गई। 47 दिन बाद जब वजन डेढ किलो पार हुआ तो चम्मच से दूध शुरू किया गया।

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बच्ची को बचाने के लिए शिशुरोग विभाग के डॉक्टरों ने भी पूरी मेहनत की जिसकी बदौलत वह बच गई। अधीक्षक डॉ अफजल हकिम ने बताया कि अस्पताल में 54 दिन तक उपचार पूरी तरह से निःशुल्क सरकारी
योजना के तहत किया गया। बच्ची को 54 दिन बाद मंगलवार को डिस्चार्ज किया गया अब समय उसका वजन पौने दो किलो है। अस्पताल की नर्सरी में बडी संख्या में प्रीमेच्योर बच्चे आते हैं। सात माह से कम समय के नवजात को बचाना बहुत चुनौतिपूर्ण होता है। इसमें डॉक्टर्स,नर्सेज के अलावा अभिभावकों की इच्छा शक्ति भी महत्वपूर्ण होती है।

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उपचार की टीम में डॉ जेपी सोनी,डॉ हरिश मौर्य,डॉ नितेश सहित विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर,नर्सिंग प्रभारी ललिता सोलंकी व उनकी टीम शामिल थी। अस्पताल से छुट्टी मिलने पर बच्ची के माता पिता सुमन व नरेंद्र ने डॉक्टरों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उमेद अस्पताल की नर्सरी में पूरे पश्चिमी राजस्थान से नवजात आते हैं। जिनके उपचार के लिए सभी तरह के अत्याधुनिक उपकरण यहां लगाए गए हैं। मरीजों के बढते दबाव के चलते अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों व बाहर से आने वालें बच्चों के लिए अलग-अलग नर्सरी हैं। पूरे संभाग के अलावा जोधपुर के निजी व एम्स जैसे अस्पताल से भी यहां बच्चे रैफर होकर आते हैं। यहां पर ऐसे नवजात की आंखों और सुनने की क्षमता की भी स्क्रिनिंग शुरू की गई है।

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