आरटीई की सत्र 2023-24 की गाइडलाइन से दो शिक्षण संस्थानों में जबरन प्रवेश पर रोक

पुनर्भरण राशि का भुगतान कक्षा एक में आने के बाद मिलने सम्बन्धी दिशा-निर्देशों का विरोध

जोधपुर,आरटीई की सत्र 2023-24 की गाइडलाइन से दो शिक्षण संस्थानों में जबरन प्रवेश पर रोक। राजस्थान उच्च न्यायालय ने शहर की गायत्री टेक्निकल एज्युकेशन ट्रस्ट की दो शिक्षण संस्थान दिल्ली पब्लिक अपर प्राइमरी स्कूल व ऐस इंटरनेशनल स्कूल की याचिका पर सुनवाई करते हुए शिक्षा का अधिकार अधिनियम सत्र 2023-24 की गाइडलाइन,प्रवेश प्रक्रिया की समय सारिणी व दिशा निर्देश के तहत स्कूल में बच्चों को जबरन प्रवेश पर रोक लगा दी है। गायत्री टेक्निकल एज्यूकेशन ट्रस्ट के अन्तर्गत संचालित दिल्ली पब्लिक अपर प्राइमरी स्कूल व ऐस इन्टरनेशनल स्कूल जोधपुर के चैयरमैन भूपेन्द्र सिंह राठौड़ की तरफ से शिक्षा का अधिकार अधिनियम के सत्र 2023-24 की गाइड लाइन के विरुद्ध राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई जिस पर न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा 2023 हेतु जारी दिशा-निर्देशों, प्रवेश प्रक्रिया की समय सारणी तथा उक्त दिशा निर्देशों के तहत बच्चों को याचिकाकर्ता के विद्यालय में आरटीई एक्ट के अनुसरण में प्रवेश दिये जाने पर रोक लगाई है।

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परेशानी का कारण विभाग की लापरवाही
राज्य में संचालित विद्यालयों में आरटीई एक्ट के अन्तर्गत 2019 तक सामान्य रूप से नियमानुसार विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा था तथा सम्पूर्ण प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से क्रियान्वित थी परन्तु वर्ष 2020 में राज्य सरकार ने नियमावली जारी कर स्पष्ट किया कि कक्षा एक में ही आरटीई एक्ट के तहत प्रवेश दिया जायेगा। कक्षा एक से पूर्व की कक्षाओं में आरटीई एक्ट के तहत प्रवेश नही दिया जायेगा। वर्ष 2021 में अभिभावकों ने इस नियम का विरोध किया जिसके फलस्वरूप राजस्थान उच्च न्यायालय ने सत्र 2021 में व पुनः 23 मई 2022 को राज्य सरकार को वर्ष 2022 सत्र में विद्यार्थियों को प्री प्राइमरी कक्षाओं, नर्सरी, केजीए प्रेप आदि कक्षाओं में आरटीई एक्ट के तहत नियमानुसार प्रवेश देने हेतु निर्देशित किया परन्तु विभाग की लेट.लतीफी व लापरवाही की वजह से इस नियम की क्रियान्विति फरवरी 2023 में हो पायी जिसकी अवधि मात्र एक माह अर्थात मार्च 2023 थी। इतने कम समय में सम्पूर्ण प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण कर पढ़ाने एवं परीक्षा आयोजित कर विद्यार्थियों को प्रमोट करना मात्र औपचारिकता ही रही। सरकार द्वारा मार्च 2023 में नई नियमावली निकाली गई जिसमें स्पष्ट किया गया कि गैर सरकारी विद्यालयों द्वारा पूर्व में प्राथमिक कक्षाओं में लिये गये निःशुल्क प्रवेशित विद्यार्थियों के कक्षा 1 में क्रमोन्नत होने के पश्चात राज्य सरकार द्वारा पुनर्भरण प्रारम्भ किया जायेगा। सभी पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में गैर सरकारी विद्यालय द्वारा उक्त निःशुल्क प्रवेशित विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करना वाध्यकारी है। उक्त दिशानिर्देशों के कारण राज्य सरकार और निजी विद्यालयों के मध्य विरोधाभास उत्पन्न हुआ तथा न्यायालय के हस्तक्षेप से इस पॉलिसी को स्थगित किया गया।

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सरकार द्वारा स्वयं आरटीई एक्ट के नियमों को खारिज करना निराशाजनक एवं असंवैधानिक
दिल्ली पब्लिक अपर प्राइमरी स्कूल व ऐस इन्टरनेशनल स्कूल जोधपुर की अधिवक्ता लक्ष्मी राठौड़ का कहना है कि बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 भारत की संसद का एक अधिनियम है जिसे 4 अगस्त 2009 को अधिनियमित किया गया था। यह अधिनियम बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के लिए पारित किया गया था। इसके तहत निजी स्कूलों को वंचित बच्चों के लिए 25 सीटें मुफ्त में आरक्षित करने और इसकी प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा की जानी होती है। लेकिन वास्तविकता कुछ अलग है।भुगतान वर्षों तक जारी नहीं किया जाता है। सरकार भुगतान की मात्रा तय करती है जो बहुत कम है और इस संबंध में स्कूलों से परामर्श नहीं करती है और न ही सरकार ने प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने के बारे में सोचा है बल्कि उसने राशि कम कर दी है। जब प्रतिपूर्ति की बात आती है तो राज्य बोर्ड,सीबीएसई और अंतर्राष्ट्रीय बोर्ड जैसे सभी बोर्डों के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाता है। इस तथ्य के बावजूद कि विभिन्न बोर्डों को विभिन्न शुल्क और संबद्धता राशि के मामले में सरकार को अलग-अलग खर्च वहन करना पड़ता है। इस बार सरकार एक कदम आगे बढ़कर इस वर्ष प्रतिपूर्ति का भुगतान न करने की बात कह रही है। सरकार स्वयं आरटीई अधिनियम के बारे में नहीं जानती है और इसके नियमों और विनियमों को खारिज कर रही है जो असंवैधानिक है। राज्य सरकार की स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2023-24 में प्रवेश के लिए जारी की गई गाइड लाइन ही आरटीई अधिनियम की धारा 12 (1) (C) के परंतुक के विपरीत है। इसके अलावा राज्य सरकार इस कानून की धारा 12 (2) के तहत प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी फीस के पुनर्भुक्तान करने के लिए जवाबदेह है। ऐसे में राज्य सरकार की नई गाइडलाइन गलत है।

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