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कृषि भूमि रकबा कम करने पर राजस्व विभाग को नोटिस

हाईकोर्ट ने दिए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),कृषि भूमि रकबा कम करने पर राजस्व विभाग को नोटिस। राजस्थान हाईकोर्ट के अवकाशकालीन जस्टिस मुकेश राजपुरोहित ने कृषि भूमि के रकबे में कमी किए जाने के मामले में राजस्व विभाग को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया है। यह मामला रिसेटलमेंट प्रक्रिया से जुड़ा है।

याचिका में बताया गया है कि राज्य सरकार वर्तमान में विभिन्न तहसीलों में रिसेटलमेंट का कार्य करवा रही है। इसी प्रक्रिया के तहत झंवर तहसील के कई किसानों की जमीनों का रकबा कम कर दिया गया, जबकि कुछ का बढ़ा दिया गया। किसानों ने इस कार्रवाई के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन उन पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

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याचिकाकर्ता तख्तसिंह व अन्य की ओर से अधिवक्ता हरिसिंह राजपुरोहित ने कोर्ट में तर्क दिया कि राजस्व अधिकारियों ने रिसेटलमेंट की कार्यवाही का तहसील में कोई प्रचार- प्रसार नहीं किया।अधिवक्ता ने यह भी बताया कि इस संबंध में न तो किसी अखबार में विज्ञापन दिया गया और न ही खातेदारों को नोटिस जारी किए गए। उनकी आपत्तियों पर भी विचार नहीं किया गया। यह कार्रवाई 2018 और 2021 के नोटिफिकेशन का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट ने जैसलमेर दरगाह मामले में सरकार से मांगा जवाब
राजस्थान हाईकोर्ट ने जैसलमेर जिले के रामगढ़ स्थित पीर मोहम्मद शाह जिलानी दरगाह को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। दरगाह के ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं। सरकार ने जवाब पेश करने के लिए हाईकोर्ट से समय मांगा है।

अवकाशकालीन पीठ के न्यायाधीश जस्टिस बलजिंदरसिंह संधू ने मामले की अगली सुनवाई 29 जून को निर्धारित की है। पीठ ने याचिकाकर्ता को नोटिस का जवाब देने की स्वतंत्रता भी प्रदान की है। याचिका में बताया गया है कि यह दरगाह करीब 200 साल पुरानी है और लंबे समय से धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रही है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और हर साल आयोजित होने वाले उर्स कार्यक्रम को भी स्थानीय प्रशासन अनुमति देता रहा है।

याचिकाकर्ता ने यह भी जानकारी दी कि दरगाह के पास स्थित कब्रिस्तान को देखते हुए ग्राम पंचायत ने 2021 में तीन बीघा भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव पारित किया था,जो अब तक पेंडिंग है। दरगाह समिति का आरोप है कि जून 2026 में सीमा क्षेत्रों में अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई के बाद जारी किया गया।

यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट द्वारा संरचनाओं के ध्वस्तीकरण संबंधी निर्धारित प्रक्रिया और दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए न्यायालय से समय मांगा।

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