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वर्तमान संचालक को फंसाने के लिए कैंटीन में रखा डोडा-पोस्त

  • आयुर्वेद विवि में कैंटीन का ठेका रद्द होने पर ठेकेदार ने रची साजिश
  • आरोपी गिरफ्तार

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),वर्तमान संचालक को फंसाने के लिए कैंटीन में रखा डोडा-पोस्त। करवड़ थाना क्षेत्र स्थित आयुर्वेद यूनिवर्सिटी परिसर में कैंटीन का ठेका छूटा तो पूर्व ठेकेदार ने वर्तमान संचालक को फंसाने के लिए कमरे में डोडा पोस्त रखवा दिया। हालांकि, वर्तमान संचालक के खिलाफ रची साजिश पुलिस की समझदारी से नाकाम हो गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अवैध डोडा पोस्त जब्त कर लिया है। मामले की आगे की जांच मथानिया थाना पुलिस अधिकारी तुलसी चौधरी को सौंपी गई है।

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दरअसल आरोपी घड़ाव पुलिस थाना करवड प्रदीप कुमार ग्वाला के हाथ से कैंटीन का ठेका निकल गया और ड्राइवर की नौकरी भी चली गई। जिससे गुस्सा होकर आरोपी ने वर्तमान कैंटीन संचालक बासनी लाच्छा निवासी नरेश चौधरी को फंसाने के लिए उसके खिलाफ साजिश रच डाली। आरोपी ने बंद कमरे में अवैध डोडा पोस्त रखकर खुद ही अपने परिचित के जरिए पुलिस को सूचना भिजवा दी।

हालांकि,पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की मुस्तैदी के चलते पूरी साजिश का भंडाफोड़ हो गया और एक बेगुनाह जेल जाने से बाल-बाल बच गया। पुलिस को सूचना मिली थी कि आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर स्थित हरिओम फास्ट फूड कैंटीन के एक कमरे में अवैध डोडा पोस्त रखा हुआ है।

सूचना मिलते ही एएनटीएफ के जोधपुर ग्रामीण प्रभारी प्रमीत कुमार,करवड़ थाना अधिकारी परमेश्वरी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने जब कैंटीन के वर्तमान संचालक से पूछताछ की,तो उसने बताया कि कैंटीन परिसर का एक कमरा अभी भी पूर्व ठेकेदार प्रदीप कुमार के कब्जे में है और उसने चाबी अपने पास रखी हुई है।

कमरे का ताला तोडक़र निकाला डोडा पोस्त
पुलिस ने विश्वविद्यालय कुलसचिव से स्थिति स्पष्ट की और मौके पर पूर्व ठेकेदार प्रदीप कुमार को बुलवाया। जब उससे कमरे की चाबी मांगी गई, तो उसने चाबी होने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने गवाहों की मौजूदगी में कमरे का ताला तोड़ा। कमरे की तलाशी लेने पर कांच की बोतलों के नीचे से 125 ग्राम अवैध डोडा पोस्त बरामद हुआ।

पुलिस की पूछताछ में आरोपी प्रदीप कुमार ने पूरी साजिश का सच उगल दिया। उसने बताया कि वह पूर्व में इसी कैंटीन को संचालित करता था और साथ ही विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ऑफिस में ड्राइवर भी था। हाल ही में उसे ड्राइवर की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था और इस बार कैंटीन का ठेका भी एक दूसरी एजेंसी के हाथ चला गया।

इसी दोहरे नुकसान और रंजिश के चलते उसने वर्तमान कैंटीन संचालक को एनडीपीएस एक्ट के झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची। इसके लिए उसने बंद कमरे में खुद ही डोडा पोस्त रखवा दिया और फिर अपने एक परिचित के जरिए पुलिस को शिकायत भिजवा दी, ताकि पुलिस रेड मारकर नए संचालक को सीधे जेल भिजवा दे।