59 वर्ष बाद बना है पंचग्रही योग

जोधपुर, उत्तरायण सूर्य आराधना का पर्व मकर संक्रांति आज मनाई जा रही है। संक्रांतिकाल में पंचामृत स्नान के बाद तर्पण व स्नानदान का महत्व होने से संक्रांति पर्व पर श्रद्धालु सूर्य की आराधना के साथ ही पवित्र जलाशयों में स्नान करेंगे। इस दौरान घरों में भी तिल से विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाएंगे। ठाकुरजी के मंदिरों में पूजा-अर्चना और भगवान को तिल के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। संक्रांति से पहले बुधवार शाम पंजाबी, सिख समाज के लोगों ने लोहड़ी का पर्व मनाया। पौष शुक्ल प्रतिपदा गुरुवार को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। ज्योतिषविदों के मुताबिक सुबह 8.15 बजे सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया। मकर संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 7.31 से शाम 5.50 बजे तक है। मकर संक्रांति से मलमास की समाप्ति होगी, लेकिन दो दिन बाद ही गुरु का वृद्धत्व दोष तथा पांच दिन बाद गुरु का तारा अस्त होने से शुभ कार्यों पर पुन: विराम लग जाएगा। ज्योतिषियों के मुताबिक मकर संक्रांति के दिन पंचग्रही योग रहेगा। 13 जनवरी को मकर राशि में चंद्रमा का प्रवेश, तथा सूर्य का 14 जनवरी को 8.15 बजे मकर राशि में प्रवेश होने के साथ मकर राशि में पहले से चल रहे बुध, गुरु और शनि के होने से पंचग्रही योग का निर्माण हो रहा है। ऋतु परिवर्तन के साथ ही सर्दी मकर संक्रांति कम होने लगती है, लेकिन इस बार योग के कारण शीतलहर का असर देखने को मिलेगा। करीब 59 साल पहले सन 1962 में सक्रांति पर पंचग्रही योग बना था। सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश के साथ मलमास की समाप्ति होगी। धनुमास की समाप्ति के पांच दिन बाद गुरुअस्त होंगे, किंतु उसके पूर्व के तीन दिन वृद्धत्व दोष होने के कारण 16 जनवरी शनिवार से ही मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे लेकिन गृहप्रवेश, नामकरण आदि के शुभ कार्य 15 जनवरी को ही संपन्न हो सकेंगे। 19 जनवरी को सुबह 11.30 बजे गुरु अस्त होंगे। सूर्य धनु राशि को छोड़ 14 जनवरी को मकर राशि में सुबह 8.13 बजे प्रवेश किया । अर्थात इस बार मकर संक्रांति का पर्व एक दिन मनाया जाएगा। पूरा दिन पुण्यकाल रहेगा। लोग तुल लड्डू, कम्बल दान करने के साथ ही धार्मिक स्थानों में पुण्य की डुबकी लगाएंगे। 2015 और 17 में सुबह 7 बजकर 39 मिनट पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होने से एक दिन मकर संक्रांति पर्व मनाया गया था। पंडितों के अनुसार दान और पुण्य का यह पर्व ग्रहों के चाल की वजह से कई बार दो दिन मनाया जाता रहा है। लेकिन इस बार सुबह ही पुण्यकाल प्रारंभ हो रहा है। मकर संक्रांति पर्व के दिन से ही सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होगा और धीरे-धीरे दिन बड़ा होगा।