आयुर्वेद विश्वविद्यालय में व्याख्यान का आयोजन
आधुनिक परिप्रेक्ष्य में धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की प्रासंगिकता
जोधपुर,डाॅ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन आयुर्वेद विश्वविद्यालय के मौलिक सिद्धांत विभाग द्वारा संहिता और सिद्धांत में चिकित्सा शिक्षा प्रौद्योगिकी विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया।कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के मौलिक सिद्धांत विभाग की विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ.निशी अरोड़ा ने धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष के आधुनिक परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिकता विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष भारतीयता के चार स्तम्भ हैं।
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भारतीय संस्कृति के परिचायक वर्णाश्रम धर्म इन चारों ही पुरुषार्थाें को समृद्ध करते हैं। ये चारों पुरुषार्थ मानव व्यक्तित्व का निरंतर परिमार्जन करते हैं, जिससे अहंकार का त्याग, अनुशासन,आत्मसंयम,लक्ष्य के प्रति एकाग्रता आदि गुण विकसित होते हैं। अपने व्याख्यान में उन्होंने स्वाभाविक, व्यावसायिक एवं साधारण धर्म की परिभाषा देते हुए बताया कि ये गुण व्यक्तिगत,सामाजिक रूप से तथा प्राकृतिक रूप से परिवेश को उन्नत बनाते हैं।
इस अवसर पर अपने उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.प्रदीप के.प्रजापति ने बताया कि अध्ययन के प्रति तत्परता मनुष्य का प्राथमिक धर्म है तथा सभी को नित्यप्रति अध्ययन के लिए सजग रहना चाहिए। इस तरह के व्याख्यान विषय-वस्तु को समृद्ध करते हैं तथा इससे अनेक नवाचारों की संभावनाएं जन्म लेती है। इस अवसर पर प्राचार्य,प्रोफेसर महेन्द्र शर्मा,प्रो. गोविन्द सहाय शुक्ला,प्रो.चन्दन सिंह, प्रो.नीलिमा रेड्डी,डाॅ.राकेश शर्मा, डाॅ. दिनेश शर्मा,डाॅ.श्योराम शर्मा, डाॅ. अरूण दाधीच,डाॅ. विष्णु दत्त शर्मा, डाॅ.शिल्पा कच्छवाह,डाॅ. नवनीत दाधीच, डाॅ. भानुप्रिया चैधरी समेत स्नातक छात्र एवं स्नातकोत्तर अध्येता उपस्थित थे। संचालन डाॅ.मोनिका वर्मा ने किया।अंत में डाॅ.देवेन्द्र चाहर, विभागाध्यक्ष,मौलिक सिद्धांत विभाग ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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