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जिम्मेदारों की उपेक्षा का शिकार हो रहा है सम्राट अशोक उद्यान

  • ऊबड़-खाबड़ टाइलों से ठोकर खाते हैं लोग
  • उद्यान में जगह-जगह फैला अंधेरा दे रहा हैं अनहोनी को आंत्रण
  • गेट पर पुलिस का नहीं रहता पहरा
  • झुकी हुई डालियां पाथ-वे पर टूटकर गिरने से हो सकती हैं जनहानि
  • उद्यान में आवारा कुत्तों का है साम्राज्य
  • शौचालयों में पानी का अभाव,फैली रहती हैं बदबु
  • जॉगिंग ट्रैक पर चलने वाले लोगों से खिलाड़ी परेशान

जोधपुर,शहर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड इलाके में स्थित सम्राट अशोक उद्यान चौपासनी हाउसिंग बोर्ड तथा उसके आसपास की कॉलोनियो में रहने वाले लोगों के लिए वरदान है। विशाल क्षेत्र में फैले सम्राट अशोक उद्यान का शांत वातावरण, यहाँ की हरियाली व शुद्ध हवा हर आयु वर्ग के लोगों को लुभाती रही है। यही कारण है कि यहाँ प्रतिदिन प्रात: 5 से रात 9 बजे तक हजारों की संख्या में हर आयु वर्ग के स्त्री पुरुष पैदल घूमने,व्यायाम व योग करने तथा समय व्यतीत करने आते हैं। भारतीय सेना अथवा पुलिस में भर्ती की तैयारी करने वाले युवा तथा विभिन्न खेलों से जुड़े खिलाड़ी भी अलसुबह व्यायाम करने व जॉगिंग ट्रैक पर दौड़ लगाने आते हैं। उद्यान में लगे झूले व रंगीन फव्वारे छोटे बच्चों के आकर्षण का केंद्र हैं।

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विडंबना यह है कि जिम्मेदारों की लापरवाही व उपेक्षा के चलते यह उद्यान अव्यवस्थाओं का शिकार हो रहा है जिसका खामियाजा यहाँ घूमने आने वाले लोगों को उठाना पड़ रहा हैं। उद्यान के इनर ट्रैक पर अनेक जगह पर फ्लोरिंग टाइल ऊबड़- खाबड़ हैं। कई स्थान पर टाइलें उखड़ गई हैं जिनसे ठोकर खाकर आए दिन लोग चोटिल होते हैं। गत दिनों फ्लोरिंग मरम्मत कार्य तो किया गया था किंतु अभी भी लोग आये दिन ठोकर खाकर गिरते हैं।

उद्यान में रोशन के लिए पर्याप्त संख्या में लाईटों की व्यवस्था की गयी है लेकिन इनमें से कुछ लाईटे लंबे समय से खराब पड़ी हैं। इस कारण से उद्यान के आऊटर जॉगिंग ट्रैक व पाथ-वे पर तथा उद्यान के अंदर के कुछ हिस्सों में अंधेरा रहता हैं। उद्यान के आसपास निवास करने वाली अनेक युवा लड़कियाँ व महिलाएं उद्यान में अकेले घूमने आती हैं। अंधेरे के कारण उनके साथ कभी भी अनहोनी घटना हो सकती है। अंधेरे वाली जगहों पर अशोभनीय गतिविधियों में लिप्त युवक-युवतियां बैठे रहते हैं। पूर्व में उद्यान के गेट पर शाम व देर रात तक पुलिस का पहरा रहने के कारण अवांछनीय गतिविधियों पर अंकुश था किंतु अब ऐसा नहीं हैं।

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उद्यान में अनेक पेड़ों की डालियाँ अधिक लंबी हो जाने के कारण झुककर लाइटो की रोशनी को ढक रही हैं इस कारण से भी उद्यान के कई हिस्सों में अंधेरा रहता हैं। उद्यान में आने वाले लोगों ने बताया कि गत दिनों आई बारिस व तेज हवा के कारण ऐसी अनेक डालियाँ उद्यान के पाथ-वे पर गिरी थी। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। डालियों के टूटने से कोई दुर्घटना न हो इसके लिए झुकी हुई डालियाँ की समय-समय पर छऺगाई करवाने की दरकार है।

उद्यान में लगे चेतावनी बोर्ड पर लिखा है कि पालतू कुत्तों को उद्यान में लाना मना हैं लेकिन यहाँ आवारा कुत्ते झुंड में बेरोकटोक विचरण करते रहते हैं जो लोगों को कभी भी हानि पहुँचा सकते हैं। उद्यान के गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड आवारा कुत्तों के उद्यान में प्रवेश को रोकने का प्रयास ही नहीं करते। आवारा कुत्तों के झुंड को उद्यान के जलाशय में आराम फरमाते हुए भी देखा जा सकता है। सिक्योरिटी गार्ड की लापरवाही का आलम यह है कि अनेक बार भारी भरकम सांड उद्यान में प्रवेश कर जाते हैं, फिर भटक जाने के कारण वे तेज गति से इधर उधर भागते हैं, ऐसी स्थिति में उद्यान में भय व अफ़रातफ़री का माहौल बन जाता हैं।

उद्यान में आउटर जॉगिंग ट्रेक पर महिलाओं व पुरुषों के उपयोग हेतु दो शौचालय बने हैं। किंतु शौचालयों पर लगी टंकियो में प्रायः पानी नहीं होने के कारण प्रात: घूमने आने वाले किसी व्यक्ति को शौचालय का उपयोग करने की स्थिति में विकट समस्या का सामना करना पड़ता है। शौचालयों की साफ सफाई सही तरीके से नहीं होने के कारण उनके निकट से गुजरने पर असहनीय बद्बु से दो चार होना पड़ता है। बताया गया कि शौचालय की सफाई करने वाला कार्मिक तो सुबह आ जाता है लेकिन शौचालय की टंकी में पानी न होने के कारण शौचालय की सफाई हो ही नहीं पाती। शौचालय की टंकी में पानी भरने वाला कर्मचारी दोपहर 11 बजे ड्यूटी पर आता है। सफाईकर्मी की माने तो उद्यान के आसपास रहने वाले खानाबदोस लोग चोरी छुपे उद्यान के शौचालयों को उपयोग में लेते हैं तथा गंदगी फैलाते हैं। ये लोग यहाँ शराब भी पीते है। अलसुबह शौचालय के आसपास शराब की बोतलें बिखरी पड़ी देखी जा सकती हैं। यहाँ तक कि शराब की बोतलें लेट्रिन के पोट (डब्लू सी) में भी पड़ी मिलती हैं।

उद्यान के जिम में व्यायाम हेतु बहुउद्देशीय व उपयोगी उपकरण तो लगे हैं लेकिन कुछ उपकरण लंबे समय से खराब पड़े हैं। हाल ही में उद्यान की दूसरी तरफ एक और जिम स्थापित किया गया हैं किंतु उस क्षेत्र में बेतरतीब तरीके से उग रही जंगली घास लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं। जॉगिंग हेतु आने वाले युवाओं ने बताया कि आऊटर जॉगिंग ट्रैक पर उद्यान में घूमने आने वाले लोगों के चलने के कारण दौड़ते समय अनेक बार टक्कर हो जाने पर लोग झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। आऊटर जॉगिंग ट्रैक केवल जॉगिंग करने वालों के लिए होना चाहिए।

उन्होंने सुझाया कि घूमने आने वाले लोगो को आऊटर जॉगिंग ट्रैक पर चलने से रोकने के लिए गार्ड की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि वे मजबूरी में केंद्रीय बगीचे की परिधि पर दौड़ लगाते हैं लेकिन उनके ऐसा करने से घास तो खराब होती ही है साथ ही साथ उनके चोटिल होने की संभावना भी रहती है क्योकि यह रास्ता उबड़-खाबड़ व गड्ढों से भरा हैं। खिलाडियों ने उद्यान में आवारा कुत्तों की उपस्थिति व शौचालय में पानी न होने की समस्या पर भी रोष जताया। उद्यान में आने वाले लोगों की राय है कि उद्यान में शिकायत पेटी अथवा शिकायत पुस्तिका की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि वे अपनी शिकायत व सुझाव जिम्मेदारों तक पहुँचा सकें।

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