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बालोतरा-बाड़मेर और नागौर-मेड़ता रोड रेल मार्गों विद्युतीकरण 31 मार्च तक

  • द्रुत गति से करवाया जा रहा रेल विद्युतीकरण कार्य
  • सम्पूर्ण विद्युतीकरण का इस वर्ष दिसंबर तक करने का है लक्ष्य

जोधपुर,उत्तर-पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के दो प्रमुख रेल खंडों में विद्युतीकरण का कार्य इस वर्ष 31 मार्च तक पूरा करवा लिया जाएगा। इसके साथ ही इस वर्ष के अंत तक संपूर्ण विद्युतीकरण के लक्ष्य के मद्देनजर मंडल के विभिन्न खंडों में द्रुत गति से विद्युतीकरण का कार्य प्रगति पर है। डीआरएम गीतिका पांडेय ने बताया कि जोधपुर मंडल के कुल 1676 किलोमीटर रेल मार्ग में से अब तक 300 किलोमीटर रूट का विद्युतीकरण किया जा चुका है तथा इसमें से जोधपुर-मारवाड़ जंक्शन रेल मार्ग पर इलेक्ट्रिक ट्रैक पर कुछ ट्रेनों का इलेक्ट्रिक लोको से संचालन भी आरंभ हो चुका है।

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उन्होंने बताया कि विद्युतीकरण कार्यों के तहत जोधपुर-बालोतरा के बीच 114 किलोमीटर,बीकानेर से नागौर के बीच 115 किलोमीटर तथा जोधपुर से मारवाड़ जंक्शन के बीच 104 किलोमीटर मार्ग का विद्युतीकरण पूरा करवा लिया गया है। इसके साथ ही इन मार्गों पर विद्युत आपूर्ति हेतु विद्युत उप केंद्रों का भी निर्माण पूरा हो चुका है। डीआरएम ने बताया कि बालोतरा से बाड़मेर रेलवे स्टेशनों के बीच 96 किलोमीटर तथा नागौर से मेड़ता रोड जंक्शन रेलवे स्टेशनों के बीच 57 किलोमीटर मार्ग पर विद्युतीकरण का कार्य द्रुत गति से करवाया जा रहा है जिसे इसी वर्ष 31 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रेलवे निर्धारित किया है।

विद्युत का ट्रैक से होंगे फायदे

विद्युत कर्षण यातायात का एक पर्यावरण अनुकूल,प्रदूषण मुक्त और ऊर्जा संरक्षित करने वाला माध्यम है और ऊर्जा के स्रोत के रूप में इंजन बचाने का एक उत्कृष्ट विकल्प भी है।

डीजल पर निर्भरता होगी कम

ट्रेनों के विद्युतीकरण ट्रैक पर संचालित होने से बड़ी मात्रा आयातित डीजल पर निर्भरता कम होगी तथा देश में ही उपलब्ध विकल्पों का ट्रेन संचालन में उपयोग किया जा सकेगा।

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रेलवे स्टेशनों के बीच दूरियां होगी कम

ट्रेनों के इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव से संचालन करने से स्टेशनों के बीच की दूरियां कम होंगी और यात्री समय पर गंतव्य स्टेशनों को पहुंच सकेंगे।

जोधपुर पहुंच चुका एक इलेक्ट्रिक लोको

उल्लेखनीय की रेलवे बोर्ड ने जोधपुर के भगत की कोठी डीजल शेड को चार इलेक्ट्रिक इंजन आवंटित किए हैं जिसमें से पिछले दिनों एक इंजन यहां पहुंच चुका है तथा इंजन के रखरखाव व रिपेयर के लिए स्टाफ को बड़ौदा इलेक्ट्रिक शेड भेजकर प्रशिक्षण भी दिलवाया जा चुका है। अब भगत की कोठी डीजल शेड पर डीजल के साथ-साथ इलेक्ट्रिक लोको के रखरखाव का काम भी सुचारू रूप से हो सकेगा।

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