आठ बार सर्जरी के बाद भी मुश्किलें: किडनी की नस को नुकसान पहुंचाने का आरोप
- एमडीएम अस्पताल के चिकित्सक की सलाह पर निजी अस्पताल में कराया था ऑपरेशन
- कोर्ट के आदेश पर चिकित्सकों के खिलाफ केस दर्ज
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आठ बार सर्जरी के बाद भी मुश्किलें: किडनी की नस को नुकसान पहुंचाने का आरोप। शहर के निजी अस्पताल के चिकित्सक सहित अन्य के खिलाफ इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप लगा है। पीडि़त ने अदालत में इस्तगासे के माध्यम से केस दर्ज कराया है।
एमडीएम अस्पताल के चिकित्सक की सलाह पर निजी अस्पताल में उपचार कराया गया था। आठ बार सर्जरी के बावजूद किडनी की नस को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। पीडि़त को पेशाब में खून आने लगा और पेशाब संबंधी गंभीर परेशानियां शुरू हो गई। आरोप है कि करीब आठ साल से वह अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करवा रहा है। अब तक उसके करीब आठ ऑपरेशन हो चुके हैं, लेकिन समस्या पूरी तरह ठीक नहीं हुई। पीड़ित ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही और धोखाधड़ी के आरोप लगाते हुए न्यायालय में परिवाद पेश किया।
न्यायालय के आदेश पर चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
परिवादी नागौर जिले के भावण्ड के विकास शर्मा ने यह रिपोर्ट दी है। पीडि़त ने परिवाद में बताया कि 3 दिसंबर 2018 को वह इलाज के लिए जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल गया था। वहां यूरोलॉजिस्ट डॉ.गोरधन चौधरी ने उसे किडनी की समस्या बताते हुए निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराने की सलाह दी।
इसके बाद वह बालाजी अस्पताल में भर्ती हुआ, जहां उसका ऑपरेशन किया गया। परिवादी का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान उसकी किडनी की नस काट दी गई। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और पेशाब के साथ खून आने लगा। करीब 22 दिन तक अस्पताल में भर्ती रखने के बावजूद राहत नहीं मिली।
अहमदाबाद में भी कराया इलाज
परिवाद के अनुसार हालत बिगडऩे पर उसे एंबुलेंस से एम्स अस्पताल भेजा गया।वहां ऑपरेशन के बाद छुट्टी दे दी गई। करीब दो साल बाद फिर पेशाब संबंधी परेशानी होने पर अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में इलाज कराया। वहां भी ऑपरेशन करना पड़ा। इसके करीब 10 महीने बाद दोबारा परेशानी होने लगी। इसके बाद जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में ऑपरेशन कराया और फिर नागौर के एक निजी अस्पताल में लेजर बाईपास ऑपरेशन करवाना पड़ा। परिवादी का दावा है कि अब तक करीब आठ बार ऑपरेशन हो चुके हैं, लेकिन वह आज भी पेशाब की समस्या से परेशान है।
50 हजार रुपए के भुगतान पर भी सवाल
परिवादी ने आरोप लगाया कि अहमदाबाद के राजस्थान अस्पताल में भामाशाह कार्ड से इलाज कराने के दौरान पता चला कि उसके बड़े भाई के नाम से बालाजी अस्पताल में 50 हजार रुपए का भुगतान दर्शाया गया है। जबकि उसके अनुसार उसका भाई न तो बीमार हुआ और न ही कभी बालाजी अस्पताल में भर्ती हुआ। परिवादी ने आरोप लगाया कि उसके भाई के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर भामाशाह कार्ड से राशि अस्पताल के खाते में जमा करवाई गई। पुलिस में शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
परिवादी ने बताया कि उसने 4 फरवरी 2025 को चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में शिकायत दी थी। कार्रवाई नहीं होने पर 23 अप्रैल 2025 को पुलिस उपायुक्त पश्चिम को भी रिपोर्ट दी,लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद न्यायालय में परिवाद पेश किया। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने डॉ. गोरखन चौधरी,डॉ.विष्णु अग्रवाल और अन्य के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत मामला दर्ज किया है।
Related posts:

एकल उपयोग प्लास्टिक को कहे ना

उजालों का पंच पर्व दीपोत्सव

पैकेजिंग लाइसेंस न होने पर 5 हजार का जुर्माना

जोधपुर मंडल में डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान तेज

टिकट जांच अभियान तेज: एक दिन में 729 मामलों से 5.36 लाख की वसूली

बाइक सवार युवक आवारा पशु से टकराया, मौत

मानसिक विमंदित गृह में महिला की मौत

पत्नी से अलग रहते आया अवसाद में फंदा लगाकर दी जान

