Doordrishti News Logo

कंपनी का कर्ज निदेशक की निजी संपत्ति नहीं: हाईकोर्ट

कंपनी के कर्ज के लिए निदेशक की निजी संपत्ति का हिसाब नहीं मांग सकती अदालत

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),कंपनी का कर्ज निदेशक की निजी संपत्ति नहीं: हाईकोर्ट। राजस्थान हाईकोर्ट ने कंपनी और उसके निदेशक की कानूनी पहचान को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी कंपनी के खिलाफ धन वसूली का मुकदमा लंबित होने मात्र से उसके निदेशक की निजी चल-अचल संपत्तियों का पूरा ब्योरा नहीं मांगा जा सकता। केवल कंपनी का निदेशक या शेयरधारक होने के आधार पर किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत संपत्ति को कंपनी की संपत्ति नहीं माना जा सकता।

जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने इस महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु को स्पष्ट करते हुए कहा है कि कंपनी अलग कानूनी इकाई है। निदेशक की निजी संपत्ति कंपनी की संपत्ति नहीं है। केवल धन-वसूली का मुकदमा लंबित होने से निदेशक की पूरी निजी संपत्ति का ब्योरा नहीं मांगा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए ठोस तथ्य और स्वतंत्र कानूनी आधार जरूरी है और जिस आदेश का कानूनी आधार ही उचित नहीं है, उसका पालन नहीं करने पर कंपनी का बचाव का अधिकार समाप्त नहीं किया जा सकता।

दीप्ति कुलश्रेष्ठ की पुस्तक मेरी ज़मीन-मेरा आकाश का विमोचन शनिवार को

जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने यह फैसला राजलक्ष्मी पाइप्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। हाईकोर्ट ने कॉमर्शियल कोर्ट जोधपुर द्वारा पारित उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें कंपनी और उसके निदेशक से संपत्तियों का विवरण मांगा गया था तथा इसका पालन नहीं करने पर कंपनी का बचाव समाप्त कर दिया गया था। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी ने पैरवी की।

49 लाख रुपये की वसूली का मामला
मामला 49,06,062 रुपये की वसूली से जुड़ा था। एम/एस श्रीपॉलीप्लास्ट ने एम/एस राजलक्ष्मी पाइप्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कॉमर्शियल कोर्ट में वसूली का मुकदमा दायर किया था। कंपनी को 17 अगस्त 2021 को एकतरफा कार्यवाही में ले लिया गया था। बाद में कंपनी की ओर से प्रस्तुत आवेदन स्वीकार करते हुए उसे बचाव का अवसर दिया गया। कंपनी के निदेशक की बीमारी का हवाला देते हुए लिखित बयान दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। गत 11 मई 2022 को कॉमर्शियल कोर्ट ने लिखित बयान दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया,लेकिन इसके साथ कंपनी की चल-अचल संपत्तियों के अलावा कंपनी के निदेशक गणपत लाल धूत की व्यक्तिगत चल-अचल संपत्तियों का भी खुलासा करने का आदेश दे दिया।

आदेश का पालन नहीं करने पर बचाव का अधिकार समाप्त करने की चेतावनी दी गई। कंपनी ने उसी दिन लिखित बयान दाखिल कर लागत भी जमा कर दी। इसके बावजूद 28 जून 2022 को उसका बचाव साक्ष्य पेश करने का अधिकार बंद कर दिया गया।

Related posts: