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आयुर्वेद चिकित्सक अस्थाई एडहॉक नियुक्ति तिथि से समस्त सेवा और पेंशन का हकदार

हाइकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

जोधपुर,राजस्थान हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपने एक फैसले में कहा कि आयुर्वेद चिकित्सक अस्थाई एडहॉक नियुक्ति तिथि से समस्त सेवा और पेंशन परिलाभ प्राप्त करने के हकदार है। कोर्ट ने आयुर्वेद विभाग द्वारा वर्ष 1990 से 1993 के मध्य नियुक्त हुए आयुर्वेद चिकित्सकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना नहीं करने और रिकवरी आदेशों को लेकर पेश हुई रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। इसमेें याची डॉक्टर बिजेन्द्र कुमार त्यागी सहित अन्य 10 आयुर्वेद चिकित्सकों की ओर से अधिवक्ता यशपाल खि़लेर ने पैरवी की।

याचीगण डॉक्टर बिजेन्द्र कुमार त्यागी सहित अन्य 10 आयुर्वेद चिकित्सकों की ओर से अलगअलग रिट याचिकाएं दायर कर अधिवक्ता यशपाल खि़लेरी ने बताया कि याचीगण 1973 के सेवा नियमों के अनुरूप नियमित पे-स्केल में आयुर्वेद चिकित्सक पद पर 6 मई 1990 से 31 दिसम्बर1993 के मध्य नियुक्त हुए थे, तब से बिना किसी ब्रेक के लगातार सेवा दे रहे हैं।

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इसी दरम्यान कुछ याचीगण ने आरपीएससी परीक्षा पास कर ली और शेष रहे चिकित्सकों को विभाग ने स्क्रीनिंग कमेटी के जरिए नियमित कर दिया गया और इस प्रकार याचीगण अपने प्रारंभिक नियुक्ति तिथि से नियमित सेवारत हैं। याचीगण से पूर्व नियुक्त अस्थाई आर्युवेद चिकित्सकों को विभाग ने स्क्रीनिंग कमेटी के जरिए नियमित कर समस्त सेवा परिलाभ प्रथम नियुक्ति तिथि से जारी कर दिए लेकिन याचीगण के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

इसी प्रकार इसी विभाग में अस्थाई होम्योपैथी और युनानी चिकित्सकों को भी आयुर्वेद चिकित्सा विभाग ने स्क्रीनिंग कमेटी के जरिए नियमित कर समस्त सेवा परिलाभ प्रथम अस्थाई नियुक्ति तिथि से जारी कर दिए हैं। ऐसे में याचीगण के साथ भेदभाव कर प्रथम और द्वितीय एसीपी परिलाभ को वापिस रिकवर करने के भी आदेश जारी कर दिए,जो विधि विरुद्ध है। जिस पर याचीगण ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

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याची की ओर से यह भी बताया गया कि विभाग द्वारा गठित कमेटी ने भी याचीगण के पक्ष में अनुशंसा करते हुऐ उनके प्रारम्भिक नियुक्ति तिथि से सेवा गणना किए जाने की अनुशंसा की लेकिन राज्य सरकार ने उक्त अनुशंसा नही मानते हुए याचीगण को आरपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की दिनांक या स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा नियमितीकरण आदेश की दिनांक से सेवा गणना करने का आदेश जारी कर रिकवरी आदेश जारी कर दिए, जो आदेश संविधान के प्रावधान अनुच्छेद 14 व 16 के विपरीत है।

याचीगण की ओर से बताया गया कि याचीगण की प्रथम नियुक्ति नियमानुसार निर्धारित पे-स्केल में की गई थी और तब से बिना किसी रुकावट के लगातार सेवारत हैं। काफ़ी याचीगण ने नियमनुसार आरपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है और शेष याचीगण को विभाग ने स्क्रीनिंग कमेटी गठित कर उन्हें नियमित किया जा चुका है, ऐसे में अन्य समान चिकित्सकों के अनुरूप सेवा परिलाभ नही देना असंवैधानिक है।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाअधिवक्ता ने याचिकाएं आधारहीन होने व पोषणीय नहीं होने से ख़ारिज करने की गुहार लगाई गई। जिस पर मामले की अंतिम सुनवाई पश्चात न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर ने रिट याचिकाएं स्वीकार करते हुए आदेशित किया कि याचीगण अपने प्रथम नियुक्ति तिथि से समस्त सेवा और पेंशन परिलाभ प्राप्त करने के हकदार हैं और रिकवरी आदेशों को निरस्त करते हुए आयुर्वेद चिकित्सा विभाग को निर्देशित किया कि वह याचीगण की प्रथम नियुक्ति तिथि आरपीएससी पास अथवा नियमितीकरण आदेश की दिनांक से नहीं मानकर प्रथम – प्रारंभिक नियुक्ति तिथि से मानकर ही समस्त परिलाभ जारी करें। निर्णय की पालना चार सप्ताह में करने के भी निर्देश दिए।

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