बदरीनाथ में डीजे का हंगामा: सनातन को चुनौती
✍🏻 पार्थसारथि थपलियाल
यह संपूर्ण हिमालय देव भूमि है। ज्ञानी को यहां देवी देवताओं की अनुभूति होगी धूर्तों को धंधा दिखाई देगा। हाल ही में अबोध,अज्ञान अधिकारियों ने बदरीनाथ में,जहां कुत्ता नहीं भोंकता,जहां शंख ध्वनि नहीं की जाती है वहां मौज मस्ती का शोर शराबा डीजे पर नाचने गाने और हंगामा करने की अनुमति दी। संभव है निर्णायक अधिकारी को बदरीनाथ की पावनता और लोक आस्था का ध्यान न हो लेकिन चमोली जिला प्रशासन में लंबें समय से कार्यरत बदरीनाथ संबंधी कार्य से जुड़े अधीनस्थ अधिकारियों को तो मर्यादाओं का ज्ञान होगा।
देशव्यापी बैंक हड़ताल टली 28 से 30 सितंबर तक बैंक सामान्य रूप से खुलेंगे
प्रशासन या शासन को यह अहंकार न रहे कि संविधान उनके हाथ में है। लोकमानस उससे भी ऊपर है। यह कृत्य सनातन संस्कृति पर कुठाराघात है। भारतीय जनता पार्टी के प्रबुद्ध वयोवृद्ध नेता डॉ.मुरली मनोहर जोशी की पीड़ा और चिंता पढ़ने में आयी। बहुत दुःखद और चिंता की बात है। जिन लोगों से सनातन संवर्धन की आशाएं जगी थी,वही एक एक करके मतदाताओं की उम्मीदों पर बुल्डोजर चला रहे हैं।
भूमाफिया छद्म तरीकों से उत्तराखंड में भूमियों पर कब्जा कर रहे हैं। कुछ लोग करोड़ों रुपए लगाकर उत्तराखंड में जंगलों को काट कर बड़े बड़े फाइव स्टार होटल और रिजॉर्ट बना रहे हैं। नदी क्षेत्रों को अवरुद्ध कर रहे हैं। आखिर इन्हें पर्यावरण को बिगाड़ने की या जंगल कटाई की अनुमति कैसे मिल जाती है? इनके लिए लामबंदी कौन करता है? उत्तराखंड में जो निविदाएं तैयार की जाती हैं, स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति उसके दशमांश की भी नहीं होती। अभी वीरों खाल ब्लॉक से आया एक वीडियो देखा जिसमें राजकीय कार्य करवाने के लिए जो निविदा जारी की है थी उससे साफ लगता था समझौता उच्चस्तर पर होगा। उत्तराखंड को क्या मिला?
उत्तराखंड में जहां 3,946 गांवों से लोग पलायन कर गए हैं,उस राज्य में जिला मुख्यालय पौड़ी से 34 किलोमीटर की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे ज्वालपा धाम में श्रीज्वालपा धाम संस्कृत विद्यालय पिछले 54-55 साल से श्रीज्वालपा देवी मंदिर समिति द्वारा गरीब विद्यार्थियों के लिए निशुल्क संचालित है। छात्रावास में रहने वाले छात्रों के लिए वर्षों पहले विद्यालय भवन से जुड़े एक 24 x 50 फीट के भू-भाग में छप्पर डालकर भोजनालय बनाया गया था। उत्तराखंड बनने के बाद अब स्थितियां ऐसी हो गई हैं कि छप्पर के ऊपर तिरपाल भी नही डाल सकते। भूमाफिया तैयार बैठे रहते हैं।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद वन विभाग द्वारा उस भाग को जंगलात में बताया गया। विद्यार्थियों की भोजनशाला के लिए जिस राज्य में जंगलात की भूमि के नाम पर गरीब विद्यार्थियों की भोजन शाला पर रुकावटें डाली जाती हैं वहीं हिमालयी क्षेत्र में अनेक व्यवसायी, ब्यूरोक्रेट्स और राजनीतिक लोगों के लिए चांदी हो रखी है। एक तरफ गांव के गांव खाली हो रहे हैं,दूसरी ओर गांवों के गरीब विद्यार्थियों के लिए तब कितनी कठिनाई होती है जब बरसात में वे अपना चूल्हा तक नहीं जला पाते,क्योंकि प्रशासन संवेदनशील नहीं है। इस तरह की सभी स्थितियां निंदनीय हैं।
बदरी विशाल के अंचल में डीजे? समाज खामोश!
क्रांतियां जीवित समाज लाता है। मुर्दा समाज दूसरे के कंधों की उम्मीद में रहता है। कमीशन खोर वर्ग से राष्ट्र कभी उन्नत नहीं हो सकता। कमीशनखोर होना,दुम हिलाते जानवर का भाव है। यह वर्ग पवित्र गंगाजल का दारु बनाता है और पैसे की खातिर जिस बदरी विशाल के नाम में कुत्ते भी मौन हो जाते हैं वहां डीजे बजाकर भगवान की व्यवस्था में विघ्न डालकर तिजोरियों को भरने का धंधा कर रहे हैं। समाज को जीवित रहने की आवश्यकता और प्रशासन को संवेदनशील होने की आवश्यकता है। उत्तराखंड की लोक संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन के लिए सभी सनातनी लोगों का दायित्व है।
