IIT Jodhpur की पारंपरिक शिल्प को IPR और आधुनिक बाजार से जोड़ने की पहल
100 शिल्पकारों ने किया मंथन
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),IIT Jodhpur की पारंपरिक शिल्प को IPR और आधुनिक बाजार से जोड़ने की पहल। जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन फाउंडेशन (JCKIF),आईआईटी जोधपुर ने जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन क्लस्टर (JCKIC) के तहत ‘शिल्प-अधिकार एवं नवसृजन 2.0’ कार्यशाला का आयोजन किया। एक दिवसीय कार्यशाला में करीब 100 शिल्पकारों,शिक्षकों और डिजाइन विशेषज्ञों ने भाग लिया।
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कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक शिल्प को बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR),डिजाइन नवाचार, ब्रांडिंग और आधुनिक बाजारों से जोड़कर मजबूत बनाना था।
इस पहल के दो प्रमुख भाग
‘शिल्प-अधिकार’ जिसमें IPR और डिजाइन पंजीकरण पर फोकस रहा और ‘नवसृजन 2.0’ जिसका उद्देश्य समकालीन डिजाइन के नए दृष्टिकोणों को बढ़ावा देना था। कार्यशाला में शिल्पकारों के उत्पादों के डिजाइन को पंजीकरण की दिशा में आगे बढ़ाया गया,जो उनके रचनात्मक कार्यों को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में अहम कदम है।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष JCKIF बोर्ड एवं निदेशक आईआईटी जोधपुर तथा प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय,भारत सरकार के नेतृत्व में हुआ।
उद्घाटन सत्र में डॉ.आकांक्षा चौधरी ने शिल्पकार समुदायों को ज्ञान और बाजार तक पहुंच से सशक्त बनाने पर जोर दिया। प्रो.प्रकाश तिवारी ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक अवसरों के बीच जुड़ाव की आवश्यकता बताई। प्रो.सुनील कुमार खिजवानिया ने टिकाऊ अवसरों के लिए अनुसंधान और प्रौद्योगिकी की भूमिका रेखांकित की।
कार्यशाला में आईआईटी जोधपुर और NIFT जोधपुर के विशेषज्ञों ने IPR, डिजाइन नवाचार, ब्रांडिंग,कहानी कहने की कला और बाजार से जुड़ाव पर सत्र लिए।
