न्यायिक बुनियादी ढांचा सरकार की कृपा नहीं,संवैधानिक आवश्यकता: हाईकोर्ट

नई बिल्डिंग की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट सख्त -50+10 नए कोर्ट रूम की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के दिए आदेश

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),न्यायिक बुनियादी ढांचा सरकार की कृपा नहीं, संवैधानिक आवश्यकता: हाईकोर्ट। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित मुख्य पीठ के भवन की सुरक्षा को लेकर चल रहे स्वप्रेरणा प्रसंज्ञान से दायर मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तत्काल और गंभीर कदम उठाने के आदेश दिए हैं।

गत 15 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद बुधवार देर रात जारी हुए विस्तृत फैसले में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में किसी सामान्य सरकारी विभाग की तरह नहीं माना जा सकता।

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय प्रशासन राज्य का आवश्यक संवैधानिक और संप्रभु कार्य है। अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट भवन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मरम्मत कार्य तत्काल पूरा करने और हाईकोर्ट भवन से सटे 50 कोर्ट रूम तथा भविष्य में 10 और कोर्ट रूम बढ़ाने की क्षमता वाले नए भवन के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।

दरअसल राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग के मात्र 7 साल में ही टूटने के चलते पैदा हुई सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने 10 अगस्त को स्वप्रेरणा प्रसंज्ञान लिया था। सुनवाई के दौरान विशेषज्ञों की रिपोर्ट में केंद्रीय गुंबद और भवन की स्थिति को लेकर गंभीर खतरा बताया गया। हाईकोर्ट की ओर से अदालत में रखी गई संरचनात्मक पुनर्वास रिपोर्ट में कहा गया कि भवन के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को तत्काल/अत्यावश्यक ध्यान की आवश्यकता है।

रिपोर्ट के अनुसार ऐसे सभी हिस्सों में प्राथमिकता के आधार पर पुनर्वास कार्यक्रम लागू किया जाना चाहिए। शेष 60 प्रतिशत हिस्से की भी मरम्मत की जानी चाहिए और भविष्य में इसी तरह की क्षति तथा खराबी को रोकने या उसमें देरी करने के लिए आवश्यक सावधानियां बरती जानी चाहिए।

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24 महीने में पूरा होगा पूरा मरम्मत कार्य
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि भवन की मरम्मत और पुनर्वास का काम अलग-अलग चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में करीब 11,000 वर्ग मीटर क्षेत्र को शामिल किया गया है और इसे 31 अक्टूबर तक पूरा किए जाने की संभावना है। दूसरे चरण में करीब 12,000 वर्ग मीटर अत्यधिक क्षतिग्रस्त क्षेत्र की पहचान की गई है।

इसका काम लगभग एक महीने के भीतर शुरू होने और 12 महीने में पूरा होने की संभावना है। तीसरे चरण के पहले हिस्से में करीब 10,000 वर्ग मीटर अत्यधिक क्षतिग्रस्त क्षेत्र शामिल होगा। यह कार्य सातवें महीने में शुरू होकर 24वें महीने तक पूरा किए जाने की योजना है। तीसरे चरण के दूसरे हिस्से में करीब 33,000 वर्ग मीटर क्षेत्र का निवारक रखरखाव शामिल है। इस प्रकार पूरा मरम्मत कार्य लगभग 24 महीने में पूरा होने की संभावना जताई गई है।

117.65 करोड़ का पुनर्वास बजट,57.65 करोड़ स्वीकृत हाईकोर्ट भवन के पुनर्वास कार्य की अनुमानित लागत करीब 117.65 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें से 27.41 करोड़ रुपए प्रथम चरण के लिए स्वीकृत किए जा चुके हैं। 30.24 करोड़ रुपये द्वितीय चरण के लिए स्वीकृत किए गए हैं। करीब 60 करोड़ रुपये तृतीय चरण के लिए प्रस्तावित हैं,जिसकी स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है।

अदालत के समक्ष यह भी स्पष्ट किया गया कि यह लागत मुख्य हाईकोर्ट भवन के मरम्मत की है। इसमें अधिवक्ताओं के चैंबर, महाधिवक्ता-सहायक महाधिवक्ता भवन या हाईकोर्ट परिसर के अन्य भवन शामिल नहीं हैं। कोर्ट के समक्ष रखी रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि झालामंड,जोधपुर में नए हाईकोर्ट भवन के निर्माण का मूल बजट करीब 220 करोड़ रुपये था,जबकि मौजूदा मुख्य हाईकोर्ट भवन की मरम्मत और पुनर्वास पर करीब 117.65 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

सरकार को तत्काल कार्रवाई के निर्देश
हाईकोर्ट ने भवन की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य के अधिकारियों को मरम्मत कार्य पूरा करने के लिए तत्काल कदम उठाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही जोधपुर में हाईकोर्ट भवन से सटे 50+10 नए कोर्ट रूम के निर्माण के प्रस्ताव को आगे बढ़ाकर तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने को कहा गया है। अदालत ने यह भी अपेक्षा जताई कि मामले में जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।

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