पवित्र विश्वास की एक और दुर्दांत हत्या
✍🏻पार्थसारथि थपलियाल
बाल्य काल में एक साहित्यकार सुदर्शन की लिखी कहानी हार की जीत पढ़ी थी। यह कहानी किसी जादुई मंत्र से कम न थी। बाबा भारती और डाकू खड़क सिंह के मध्य एक मानवीय विश्वास स्थापित होने और खड़ग सिंह द्वारा विश्वास घात जैसी चेष्टा पर आधारित इस कहानी का ध्येय वाक्य है-खड़ग सिंह तुम मेरा घोड़ा ले जाना चाहते हो,ले जाओ,लेकिन किसी को यह मत बताना कि तुम घोड़े को बीमार होने का नाटक कर धोखा देकर लाये हो,नहीं तो जरूरत मंद की सहायता करने से लोगों का विश्वास उठ जाएगा।
(जो इस कहानी से अनभिज्ञ हैं,हार की जीत नाम से नेट पर उपलब्ध है,पढ़ सकते हैं।)
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2025 में मेघालय की पहाड़ियों में हनीमून मनाने गये राजा रघुवंशी के क्रंदन के स्वर घाटियों में गूंज रहे हैं सोनम आखिर तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया। 2025 में ही ड्रम में रेत बजरी के बीच बंद सौरभ राजपूत उस बेदर्दी मुस्कान रस्तोगी को शायद कह न पाया होगा,कि तुमने मेरी “मुस्कान” का मर्डर क्यों कर दिया। सालभर पहले घटित इन घटनाओं की कड़ी में पुणे के केतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल ने विश्वास की हदें पारकर अपने प्रेमी संग एक परिवार के दीपक को बुझा दिया। यह मानवता के विश्वास का मर्डर है। यह सब मीडिया में चल रहा है।
जन्मदिन की पार्टी लोहागढ़ में मनाने की साजिश बिल्कुल राजा रघुवंशी-सोनम हनीमून मनाने की योजना जैसे है। ये उदाहरण समाज के कलंक हैं। इन घटिया हरकतों का समाज पर जो कुप्रभाव पड़ेगा इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
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संस्कार विहीन समाज में जहां गर्ल फ्रेंड बॉय फ्रेंड से रिश्ते शुरू होते हैं,जहां स्वतंत्रता पर स्वछंदता हावी हो जाती है,जब सामाजिक मर्यादाओं और मूल्यों का गला घोंट दिया जाता है तब समाज में ऐसी विकृतियाँ जन्म लेती हैं। कोशिश करें अपने सांस्कृतिक संस्कारों को पुनर्जीवित करें। लोगों के घरों के दीपक बुझाने की बजाय विश्वास के दीपक जलाएं।
