लोक कला-संस्कृति के 11 साधकों का सम्मान

मरुधरा गौरव सम्मान 2026

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),लोक कला-संस्कृति के 11 साधकों का सम्मान। मरुधरा लोक कला और संगीत सेवा संस्थान द्वारा *मरुधरा गौरव सम्मान- 2026 समारोह पांच बत्ती स्थित एक होटल में संपन्न हुआ। यह संस्थान का तीसरा कार्यक्रम है,जिसके तहत अब तक 33 कलाकारों को सम्मानित किया जा चुका है।

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कुलपति ने की अध्यक्षता,पूर्व न्यायाधीश मुख्य अतिथि
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.पवन कुमार शर्मा ने अध्यक्षता की,जबकि हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास मुख्य अतिथि थे। पद्मश्री अनवर खान ने विशिष्ट अतिथि के रूप में और जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की संगीत विभाग की पूर्व अध्यक्ष कविता चक्रवर्ती ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।

गणेश वंदना से हुआ आगाज, गजलों ने बांधा समां
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। बाल कलाकार तृष्णा महापात्रा एवं मनस्वी चौधरी ने गणेश वंदना एवं शिव स्तुति की मनमोहक प्रस्तुति दी। प्रख्यात गजल गायक डॉ.रौशन भारती ने अपनी मधुर गजलों से समां बांध दिया।

11 विभूतियां हुईं सम्मानित
कला,संगीत,नृत्य,चित्रकला एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 11 विशिष्ट हस्तियों को “मरुधरा गौरव सम्मान-2026” से सम्मानित किया गया।
1.स्वर्गीय सज्जन पुरोहित (मरणोपरांत)
2.पद्मश्री लाखा खान
3.भूरा राम शर्मा
4.डॉ. अनुराधा आडवाणी
5.विदुषी पुलमा दास जोशी
6.उस्ताद साबिर हुसैन खान
7.उस्ताद नियाज अहमद खान
8.डॉ. रौशन भारती
9.डॉ. मंजूषा चंद्र भूषण सक्सेना
10.लक्ष्य पाल सिंह राठौड़
11.अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार सेनू सपेरा

सेनू सपेरा वर्तमान में पेरिस प्रवास पर होने के कारण उनकी ओर से उनकी बड़ी बहन एवं अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार अलची सपेरा ने सम्मान ग्रहण किया।

संस्कृति साधकों का सम्मान जरूरी
कुलपति कुलगुरु डॉ.पवन कुमार शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थाओं का उद्देश्य केवल शिक्षा नहीं, बल्कि संस्कृति और मूल्यों का संरक्षण भी है। मरुधरा लोक कला और संगीत सेवा संस्थान इस दिशा में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।

मुख्य अतिथि जस्टिस गोपाल कृष्ण व्यास ने कहा, समाज की आत्मा उसकी संस्कृति और कला में बसती है। जब कलाकारों और संस्कृति साधकों का सम्मान होता है,तब समाज अपनी जड़ों से और अधिक मजबूत होता है।

पद्मश्री अनवर खान ने कहा, लोककला हमारी पहचान और हमारी विरासत है। कलाकारों का सम्मान केवल व्यक्तियों का सम्मान नहीं,बल्कि हमारी संस्कृति का सम्मान है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।

कविता चक्रवर्ती ने कहा, राजस्थान की धरती सदैव कला और संगीत की साधना की भूमि रही है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है।

संस्थान अध्यक्ष ने बताई उपलब्धियां
संस्थान की अध्यक्ष डॉ.स्वाति शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि पिछले तीन वर्षों में संस्थान ने कला और संस्कृति के प्रति समर्पण के साथ कार्य किया है और भविष्य की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला।

आयोजन समिति में डिम्पल गौड़,सुरभि शर्मा, डॉ.अर्चना गौड़,सुनंदा पुरोहित,अनीता टाक,रश्मि शर्मा,बिंदु श्रीवास्तव, देवयानी पंवार,स्वाति दीपक शर्मा व ज्योति भटनागर शामिल थीं। सचिव सुमन परिहार ने आभार व्यक्त किया।

संचालन डिंपल माहेश्वरी ने किया। कार्यक्रम में राजस्थानी लोक कला और संस्कृति से जुड़े संस्थाओं के पदाधिकारियों, प्रमुख समाज सेवियों और गणमान्य नागरिकों ने शिरकत की।