मानसून से पहले पशुओं का टीकाकरण जरूरी
- अदाणी फाउंडेशन ने खेड़ली गद्दीयान से शुरू किया अभियान
- 3,000 पशुओं को लगेगा गलघोंटू का टीका
कवाई/जोधपुर, (दूरदृष्टीन्यूज) ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन लाखों परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। मानसून के दौरान मौसमी बीमारियों से पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए अदाणी फाउंडेशन,कवाई ने वार्षिक पशु टीकाकरण अभियान की शुरुआत खेड़ली गद्दीयान गांव से की है।
इसे भी पढ़ें –लोक कला-संस्कृति के 11 साधकों का सम्मान
गलघोंटू से बचाव पर जोर
अभियान के तहत पशुओं को हेमरेजिक सेप्टीसीमिया (एचएस/गलघोंटू) बीमारी से बचाने के लिए टीके लगाए जा रहे हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार गलघोंटू एक गंभीर जीवाणुजनित बीमारी है, जो मानसून के दौरान तेजी से फैलती है और समय पर उपचार न मिलने पर पशुओं की मृत्यु तक का कारण बन सकती है।
3,000 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य
अदाणी फाउंडेशन का लक्ष्य करीब 3,000 पशुओं का टीकाकरण करना है। अब तक लगभग 200 पशुओं को टीका लगाया जा चुका है। अभियान के दौरान पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन, नियमित टीकाकरण, स्वच्छता और रोगों की शुरुआती पहचान के संबंध में भी जानकारी दी जा रही है।
मानसून में बढ़ जाता है खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में बढ़ी हुई नमी और संक्रमण का खतरा पशुओं को अधिक संवेदनशील बना देता है। ऐसे में मानसून से पहले किया गया टीकाकरण बीमारी की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। इससे न केवल पशुओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है,बल्कि दूध उत्पादन और पशुपालकों की आय पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी कम किया जा सकता है।
जागरूकता की कमी बड़ी चुनौती
ग्रामीण विकास से जुड़े जानकारों का मानना है कि कई बार जागरूकता की कमी के कारण पशुपालक समय पर टीकाकरण नहीं करा पाते,जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में गांव स्तर पर आयोजित टीकाकरण शिविर न केवल स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का माध्यम बनते हैं,बल्कि पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन अपनाने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
अदाणी फाउंडेशन का यह निवारक पहल पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, पशुधन की मृत्यु दर को कम करने और पशुपालन पर निर्भर ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।
