-संदर्भ विश्वरंगमंच दिवस
अधिरथी के महारथी कर्ण’ को दर्शकों ने सराहा
रिपोर्ट- पार्थसारथि थपलियाल
नई दिल्ली,’अधिरथी के महारथी कर्ण’ को दर्शकों ने सराहा। “अधिरथी” नाटक में कर्ण का चरित्र भारतीय साहित्य की उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है,जहाँ नायक केवल विजेता नहीं होता, बल्कि वह अपने संघर्ष,त्याग और नैतिक द्वंद्वों के कारण महान बनता है। महाभारत में कर्ण एक महान योद्धा है। कर्ण का जन्म कुंती और सूर्यदेव के संयोग से होता है,परंतु समाज में उसे “सूतपुत्र” के रूप में पाला जाता है। कर्ण का पूरा जीवन अभिशप्त रहा। कर्ण को गुरु द्रोणाचार्य ने शिष्य रूप में स्वीकार नहीं किया। उसे छलपूर्वक परशुराम से शिक्षा लेनी पड़ी,जहाँ सत्य उजागर होने पर उसे शाप मिला।
कर्ण अद्वितीय धनुर्धर होते हुए भी प्रतिष्ठित न हो सका। द्रौपदी के स्वयंवर में उसे “सूतपुत्र” कहकर अस्वीकार किया गया। कर्ण के जीवन की सबसे गहन वेदना उसकी माता कुंती द्वारा जन्म के समय ही कारण का त्याग कर देना है। कर्ण को सामाजिक प्रतिष्ठा इसलिए भी नहीं मिल पाई क्योंकि कारण दुर्योधन के साथ था। इन सभी दृश्यों को रश्मिरथी कविता के समानांतर गूंथा गया था। कर्ण का जीवन एक संघर्षशील मनुष्य की गाथा है,जो अपमान और तिरस्कार के बीच भी अपने आत्मसम्मान, दानशीलता और निष्ठा को बनाए रखता है।
“अधिरथी” नाटक में इस तथ्य को विशेष रूप से उभारा गया है कि कर्ण का वास्तविक संघर्ष बाह्य शत्रुओं से अधिक सामाजिक व्यवस्था से है। जातिगत भेदभाव और सामाजिक तिरस्कार उसके व्यक्तित्व को निरंतर आहत करते हैं।
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आकाशवाणी दिल्ली के रंग भवन सभागार में विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च) के उपलक्ष्य में आकाशवाणी दिल्ली के नाटक विभाग द्वारा विक्रम संवत नव वर्ष के अवसर पर 19 मार्च को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी रचना रश्मिरथी से प्रेरित नाटक अधिरथी का मंचन आमंत्रित श्रोताओं के समक्ष आयोजित किया गया। नाटक प्रदर्शन के आरंभ में मुख्य अतिथि दूरदर्शन महानिदेशक के. सतीश नंबूदरीपाद ने दीप प्रज्ज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया। उनके साथ आकाशवाणी दिल्ली की कार्यक्रम प्रमुख मनीषा जैन और सहायक निदेशक (कार्यक्रम) प्रमोद कुमार भी थे।
नाटक के विभिन्न दृश्य झकझोरने वाले थे। इस नाटक में प्रमुख पात्रों की भूमिका में कलाकारों का विवरण कर्ण की भूमिका में शुभम शर्मा,कुंती की भूमिका में जसकिरण चोपड़ा,द्रोणाचार्य-तरुण, दुर्योधन-वैभव पॉल अर्जुन-कृष बब्बर,कृष्ण-धर्म गुप्ता भीष्म- धीरज,अभिमन्यु-हर्षित और जयद्रथ की भूमिका में विनायक थे। सभी कलाकारों का अभिनय सराहनीय था।
कॉस्ट्यूम युगीन परंपरा के अनुसार थे,जो युवा कलाकारों पर बहुत आकर्षक लग रहे थे। ध्वनि प्रभाव और प्रकाश संयोजन ने नाटक को ऊंचाइयां दी। काजल सूरी आकाशवाणी दिल्ली में नाटक विभाग की प्रमुख है। सुप्रसिद्ध नाटक कलाकार हैं। उनके निर्देशन में नाटक अधिरथी का मंचन हुआ। बार बार संवादों और भावों पर दर्शकों की तालियों से प्रमाणित हुआ कि दर्शकों को नाटक बहुत पसंद आया। नाटक समाप्ति पर दर्शकों ने उत्साहपूर्ण अभिव्यक्ति दी। उद्घोषणाएं नीलम मालकानिया ने की।
