एमडीएम अस्पताल में राज्य की पहली इंडोवैस्कुलर की आधुनिक सर्जरी

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),एमडीएम अस्पताल में राज्य की पहली इंडोवैस्कुलर की आधुनिक सर्जरी।डॉ.एसएन मेडिकल कॉलेज के माथुरादास माथुरअस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग में हुई राजस्थान की पहली ऐओर्टिक आर्च ‌एन्यूरिज्म की सफल डीब्रांचिंग के साथ इंडोवैस्कुलर टीवार तकनीक की आधुनिक सर्जरी।

सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ सुभाष बलारा ने बताया कि 61 वर्षीय अब्दुल सलीम तथा 65 वर्षीय धान सिंह शरीर की महाधमनी अयोर्रटा के आर्च एन्यूरिज्म से पीड़ित थे। यह दोनों पेशेंट इस महाविद्यालय के सिटीवीएस विभाग में जयपुर से रेफर हुए जो हमारे लिए एक गर्व की बात है। पूर्ण राजस्थान के गवर्नमेंट सेक्टर में यह सुविधा एमडीएम अस्पताल में ही मौजूद है और संभवतः डीब्रांचिंग के साथ इंडो वैस्कुलर टीवार टेक्नोलॉजी राजस्थान की प्रथम सर्जरी है। यह दोनों मरीज गत 6 महीनों से छाती में दर्द,सांस फूलना तथा अधिक रक्तचाप से पीड़ित थे इनकी जांचे -सिटी एंजियोग्राफी,एमआरआई, इकोकार्डियोग्राफी में शरीर की महाधमनी अयोर्रटा के थोरेसिक आर्च में एन्यूरिज्म होने की पुष्टि हुई।

मरिज तथा उनके परिजनों से सहमति के उपरांत इन दोनों मरीजों की सफल सर्जरी की गई। इस सर्जरी में मरीज की बिना छाती खोले गरदन में छोटे चीरे तथा जांघ में नीडल पंचर होल के जरिए इंडो वैस्कुलर तकनीक टीवार के माध्यम से संपन्न की गई।

ऑपरेशन टीम
सिटीवीएस विभाग के डॉ सुभाष बलारा,डॉ अभिनव सिंह,डॉ देवाराम, डॉ अमित,निश्चेतन विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ राकेश करनावत,सहायक अचार्य डॉ भरत चौधरी,डॉ कीर्ति,डॉ रितु,
परफ्यूशनिस्ट माधो सिंह और मनोज,कैथलैब टेक्नीशियन धर्मेंद्र मरेठा व प्रेम,ओटी स्टाफ दिलीप, मोनिका,रितु,नीलम,शक्ति बिलाल, सीटी आईसीयू के डॉ धर्मेंद्र,डॉ प्रशांत और डॉ प्रदुम्न सीटीआईसीयू स्टाफ राजेन्द्र,राहुल,भंवर ने इलाज में अहम भूमिका निभाई।

सिटीवीएस विभाग के सहायक आचार्य डॉ अभिनव सिंह ने बताया कि ऑयोर्टिक आर्च एन्यूरिज्म एक दुर्लभ एवं जटिल बीमारी है जिसका इनसीडेनंस नॉर्मल पापुलेशन में 10 प्रति लाख होता है। यह बीमारी महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में दो से चार गुना ज्यादा होती है और इनके मैरिज 60 से 70 दशक की उम्र वाले होते हैं। बीमारी के मुख्य कारण शरीर की महाधमनी अयोर्रटा में एथेरोईसकेरोसिस(चर्बी जमना),हाई ब्लड प्रेशर,अधिक शुगर,धूम्रपान की लत,कनेक्टिव टिशु डिसऑर्ड,छाती में गंभीर चोट या फिर कुछ विशेष प्रकार की वायरल डिजीज एवं वैस्कुलाइटिस होता है।

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इस बीमारी के मुख्य सिंपटम हैं छाती के साथ जबड़े या कमर में दर्द होना,आकार में अधिक बड़े हो जाने के उपरांत सांस फूलना या आहार नाल का दबना होता है। समय रहते इलाज न होने से अनूरिज्म रप्चर या महादानी का डिसेक्शन इस बिमारी का एक खतरनाक प्रारूप है जो जानलेवा है। इस बीमारी की संबंधित जांचे ईको कार्डियोग्राफी, सीटी स्कैन एवं एमआरआई है। रोकथाम के लिए ब्लड प्रेशर कंट्रोल,शरीर में चर्बी तथा शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखना,धूम्रपान या मादक पदार्थों का सेवन न करना और समय-समय पर चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। इन दोनों मरीजों को सुपरा एयोर्यटिक आर्च डीब्रांचिंग सर्जरी आर्टिफिशियल‌ पीटीएफई ग्राफट‌ नली द्वारा तथा इंडोवस्कुलर तकनीक टीवार के माध्यम से उपचार किया गया।

ऑपरेशन के पश्चात मरीजों को सीटी आईसीयू शिफ्ट किया गया, जहां सारे पैरामीटर नॉर्मल होने के उपरांत मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट से हटाया गया।अब पेशेंट्स सिटीवी एस वार्ड में उपचाराधीन है जहां सभी जांचें,ब्लड पैरामीटर्स एवं सीटी रिपोर्ट्स नॉर्मल हैं।

डॉ एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एवं कंट्रोलर डॉ बीएस जोधा तथा एमडीएम हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ विकास राजपुरोहित ने सीटीवीएस टीम को बधाई दी और उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन मुख्य मंत्री चिरंजीवी चिकित्सा योजना के अंतर्गत निशुल्क किया गया।

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