ऑनलाइन दवा बिक्री व ई-फार्मेसी के विरोध में हड़ताल
- बंद रही मेडिकल की दुकानें
- केमिस्टों ने किया धरना-प्रदर्शन
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),ऑनलाइन दवा बिक्री व ई- फार्मेसी के विरोध में हड़ताल। शहर के दवा विक्रेताओं और मेडिकल स्टोर संचालकों ने ऑन लाइन फार्मेसी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये दवाओं की बढ़ती बिक्री के विरोध में आज अपनी दुकानें बंद रखी।
ठेलाकर्मी और निगम दल आमने-सामने
शहर के सभी केमिस्ट ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) के आह्वान पर ऑनलाइन दवा बिक्री व ई-फार्मेसी के विरोध में हड़ताल पर रहे।केमिस्टों ने आरोप लगाया है कि कई ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म बिना किसी नियामक निगरानी के दवाएं बेच रहे हैं। उनका दावा है कि प्रिस्क्रिप्शन (डॉक्टर के पर्चे) की अक्सर ठीक से जांच नहीं की जाती है और दवाओं के स्टोरेज और डिलीवरी से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन नहीं किया जाता है, जिससे मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर चिंता बढ़ रही है।
फार्मेसी पेशेवरों के अनुसार,पारंपरिक दवा विक्रेता,औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के सख्त नियमों के तहत काम करते हैं,जो प्रिस्क्रिप्शन की अच्छे तरीके से जांच करते हैं और उसी के हिसाब से दवाएं देते हैं। इसके उलट,उनका दावा है कि ई-फार्मेसी में अक्सर ऐसे सुरक्षा उपायों की कमी होती है।
अखिल भारतीय दवा विक्रेता संघ के कार्यकारिणी सदस्य प्रदीप वरदानी ने बताया कि जोधपुर में लगभग 3800 केमिस्टों ने बंद में भाग लिया। शहर के अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद रहने से बंद का व्यापक असर देखने को मिला। बंद को सफल बनाने में केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अरूण धारीवाल सहित हरीश दरयानी,देवेश कच्छवाहा, चन्द्र मोहन गांधी,दीपक सेठिया,मांगीलाल सुराणा,दिनेश नाथ,जयकिशन कलवानी,विमल राठी,अविनाश सिंघवी,मनोज काबरा,प्रीतम दास, मुकीम गजदर, नरपत मेहता एवं सुखराम पाल का विशेष सहयोग रहा।
यह है प्रमुख मांगें
उन्होंने अवैध ई-फार्मेसी के संचालन पर तत्काल और सख्त कानूनी कार्रवाई करने,केंद्र सरकार की अधिसूचना जीएसआर 817 (ई) और जीएसआर 220 (ई) को तुरंत वापस लेने,प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को दवा लाइसेंस देने के प्रस्ताव पर सरकार द्वारा पुनर्विचार करने,दवा बाजार में निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कड़े नियम लागू करने की मांग की है।
