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शिक्षा के माध्यम से ही बदलेंगे सामाजिक मानदंड-प्रो.सुधि राजीव

एचजेयू और यूएनएफपीए की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला

जयपुर,शिक्षा के माध्यम से ही बदलेंगे सामाजिक मानदंड-प्रो.सुधि राजीव। शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में लैंगिक संवेदनशीलता और लैंगिक समानता का पाठ लागू कर महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को अस्वीकार्य बनाने की दिशा में हम सभी को मिलकर काम करना होगा। लैंगिक समानता के मूल्यों का समावेश छात्र-छात्राओं को लैंगिक भेदभाव के खिलाफ जागरूक करना है। मौजूदा पितृसत्तात्मक समाज में शिक्षा के माध्यम से ही सामाजिक मानदंडों में बदलाव लाया जा सकता है। यह बात गुरुवार को हरिदेव जोशी पत्रकारिता व जनसंचार विश्वविद्यालय (एचजेयू) की कुलपति प्रो.सुधि राजीव ने दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कही।  उन्होंने  संयुक्त राष्ट्र  जनसंख्या  कोष (यूएनएफपीए) और एचजेयू की ओर से विवि के 40 युवा पत्रकारों को जेंडर संवेदनशीलता विषय पर प्रशिक्षित कर क्षमतावर्धन करने वाले चार महीने के प्रोजेक्ट को लॉन्च करते हुए लैंगिक समानता की महत्ता को रेखांकित किया।

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यूएनएफपीए तथा एचजेयू के संयुक्त तत्वावधान एवं लोक संवाद संस्थान के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला में पॉपुलेशन फर्स्ट की सीईओ डॉ.एएल शारदा ने कहा कि समाज में लिंग आधारित रूढ़िवादिता और लैंगिक आधार पर भूमिकाओं के निर्धारण के मुद्दे को संबोधित करने तथा लड़कियों के बीच लैंगिक भेदभाव के प्रभाव को कम करने की दिशा में इस तरह के पाठ्यक्रम काफी मददगार साबित होंगे। उन्होंने पुरुषों और महिलाओं में सैलरी के अंतर को भी रेखांकित किया। इससे पूर्व एचजेयू के प्रोफेसर डॉ.रतन सिंह शेखावत ने स्वागत उद्बोधन में कार्यशाला के आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डाला। यूएनएफ पीए के स्टेट हेड डॉ.दीपेश गुप्ता ने सभी का स्वागत करते हुए लैंगिक असमानता के खिलाफ निरंतर कार्य करने की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट पत्रकारिता के छात्रोें में नई समझ विकसित करेगा। लोक संवाद संस्थान के सचिव कल्याण सिंह कोठारी ने इस परियोजना के प्रारूप के बारे में बताते हुए इसकी जरूरत पर बल दिया।

लैंगिक भेदभाव की समझ जरूरी -डॉ.शारदा
कार्यशाला में डॉ.शारदा ने लैंगिक भेदभाव,जेंडर नॉर्म्स और उनकी भूमिका पर इंटरेक्टिव तरीके से अपनी बात रखी। उन्होंने चार महीने तक चलने वाले प्रोजेक्ट के लिए चयनित पत्रकारिता के 40 छात्रों को विभिन्न मनोरंजक उदाहरणों और प्रतियोगिताओं के माध्यम से जेंडर के बारे में समझाया। इंस्टीट्यूट ऑफ डवलपमेंट की प्रो.शोभिता राजगोपाल ने लैंगिक भेदभाव और हिंसा का मुद्दा उठाया।

युवा पत्रकारों ने सीखे लेखन के गुर
कार्यशाला में अलग-अलग सत्रों का आयोजन हुआ जिसमें विभिन्न पत्रकारों ने छात्रों को जेंडर संबंधी विषयों पर पत्रकारिता करने के गुर सिखाए। वरिष्ठ पत्रकार गोविंद चतुर्वेदी ने राइटिंग स्किल्स पर अपनी बात रखी। प्रो.हिमांशु व्यास ने फोटो स्टोरी और शॉर्ट फिल्म की बारीकियां बताईं। शालिनी अग्रवाल ने जेंडर संबंधी मुद्दों की सोशल मीडिया पर उपस्थिति के ​बारे में बात की। दैनिक भास्कर के स्टेट हेड मुकेश माथुर ने जेंडर संबंधी रिपोर्टिंग करते समय प्रयोग ली जाने वाली भाषा के बारे में समझाया। कार्यशाला का संचालन यूएनएफपीए कंसल्टेंट त्रिशा पारीक ने किया। समापन सत्र में सवाल-जवाब के माध्यम से छात्रों ने अपनी शंकाओं का समाधान किया।

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