जोजरी नदी प्रदूषित करने के आरोपियों पर पुलिस की मेहरबानी
-सरकारी गाड़ी की जगह प्राइवेट वाहन में बैठाकर कोर्ट पहुंची
-कोर्ट ने उठाए सवाल
-सभी आरोपी रिहा
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),जोजरी नदी प्रदूषित करने के आरोपियों पर पुलिस की मेहरबानी। जोजरी नदी में कथित रूप से अवैध पाइप लाइन के जरिए फैक्ट्रियों का जहरीला और दूषित पानी बहाने के मामले में गिरफ्तार सभी पांचों आरोपियों को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया।
इसमें कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के मैनेजिंग डायरेक्टर जसराज बोथरा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलेश संचेती,ट्रेजरर सांगसिंह परिहार, ट्रस्टी सुरेश खेमानी और सुपरवाइजर गोपाल शामिल हैं। हालांकि कोर्ट परिसर में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए।
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आम तौर पर छोटे-मोटे मामलों में भी आरोपियों की फोटो जारी करने और पुलिस वाहन में लाने वाली पुलिस इस बार आरोपियों के प्रभाव में नजर आई। पुलिस पांचों आरोपियों को सरकारी गाड़ी के बजाय प्राइवेट वाहन में बैठाकर कोर्ट पहुंची। मीडिया के कैमरों से बचाते हुए गुप्त तरीके से कोर्ट में ले गई। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस ने आरोपियों को रविवार को गिरफ्तार किया था।
उल्लेखनीय है कि 29 मई को जोजरी नदी में प्रदूषण फैलाने को लेकर विवेक विहार और बोरानाडा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। शुरुआत में पुलिस की ढिलाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी पुलिस की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए थे और कड़ी फटकार लगाई थी।
इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में आगामी दिनों में सुनवाई होनी है। इसके दबाव में आकर पुलिस ने आनन-फानन में यह गिरफ्तारियां की हैं,लेकिन कोर्ट में पेशी के मामले में पुलिस पर लीपापोती के आरोप लग रहे हैं। इधर एसआईटी प्रभारी एडीसी पी (पूर्व) नरेंद्र सिंह देवड़ा के अनुसार मौके पर मिले साक्ष्यों और तस्वीरों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
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मामले में पुलिस ने 14 अन्य बड़े उद्यमियों अशोक संचेती,जयंती लाल जैन,जुगनू खान, नरेंद्र छाजेड़ आदि को भी नोटिस जारी किए हैं। सोमवार को गिरफ्तार पांच आरोपियों कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया।
जांच में यह आया था सामने:-
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल,रीको,जल संसाधन विभाग और जोधपुर विकास प्राधिकरण की संयुक्त जांच में सामने आया था कि उपचारित किए बिना औद्योगिक अपशिष्ट को बायपास लाइन के जरिए सीधे रीको नाले में छोड़ा जा रहा था। यह नाला आगे जोजरी नदी में मिलकर नदी को प्रदूषित कर रहा था।
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संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर विवेक विहार थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एसआईटी ने इस मामले में 18 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। एफआईआर में सीईटीपी टेक्सटाइल ट्रस्ट और उसके संचालन से जुड़े कई पदाधिकारियों को नामजद किया गया था। पुलिस ने पहले चरण में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य नामजद व्यक्तियों की भूमिका की जांच जारी है।
