रविवार को अवकाश के बावजूद हाईकोर्ट में हुई विशेष सुनवाई
कुचेरा नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष तेजपाल मिर्धा को मिली राहत -गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),रविवार को अवकाश के बावजूद हाईकोर्ट में हुई विशेष सुनवाई। कुचेरा नगर पालिका से जुड़े मामले में रविवार को राजस्थान हाईकोर्ट में हुई विशेष सुनवाई के बाद पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान पार्षद तेजपाल मिर्धा को बड़ी राहत मिली है।
जस्टिस कुलदीप माथुर की विशेष बेंच ने मिर्धा की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।तेजपाल मिर्धा के खिलाफ हाल ही में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद गिरफ्तारी की आशंका के बीच मिर्धा ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया और दो दिन के लिए प्रोटेक्शन की मांग की थी।
याचिका में गिरफ्तारी से संरक्षण के साथ-साथ नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए समय दिए जाने की मांग भी की गई थी। मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में रविवार को विशेष सुनवाई हुई। इसके लिए जस्टिस कुलदीप माथुर की विशेष बेंच का गठन किया गया।
याचिका पर सुबह सुनवाई शुरू हुई और तेजपाल मिर्धा की ओर से उनके अधिवक्ता रामावतार चौधरी एवं सहयोगी अधिवक्ता सुमेर सिंह गौर ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। बता दे कि तेजपाल मिर्धा 14 सितंबर को कुचेरा नगर पालिका के वार्ड नंबर 21 से निर्वाचित हुए थे।
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इसके बाद उन्होंने नगर पालिका चेयरमैन पद के लिए नामांकन दाखिल किया। कुचेरा नगर पालिका के चेयरमैन पद का चुनाव 21 सितंबर को प्रस्तावित है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले एसीबी एफआईआर दर्ज होने और गिरफ्तारी की आशंका के बीच मिर्धा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
2018 की शिकायत, करीब 8 साल बाद एफआईआर याचिका में बताया गया कि तेजपाल मिर्धा इससे पहले 2015 से 2018 तक कुचेरा नगर पालिका के चेयरमैन रह चुके हैं। वर्ष 2018 में तत्कालीन वार्ड नंबर 3 के पार्षद शैतानराम टाक ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में 2015 से 2018 के कार्यकाल के दौरान विभिन्न कार्यादेश जारी करने में नगर पालिका के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ कथित मिलीभगत, वित्तीय,तकनीकी और प्रशासनिक अनियमितताओं तथा सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।
याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में तर्क दिया गया कि 2018 में शिकायत दर्ज होने के बावजूद करीब आठ वर्ष तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
इसके बाद मिर्धा के वार्ड सदस्य निर्वाचित होने और चेयरमैन पद के लिए नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद कार्रवाई आगे बढ़ी। याचिका के अनुसार, 18 सितंबर को स्थानीय स्वशासन विभाग के निदेशक-सह-विशेष सचिव ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17-ए के तहत मंजूरी प्रदान की। इसके बाद एसीबी ने उसी दिन यानी 18 तारीख को ही एफआईआर संख्या 0268/2026 दर्ज की।
याचिकाकर्ता का दावा था कि एफआईआर 18 सितंबर की रात 11.58 बजे दर्ज की गई। साथ ही आरोप लगाया गया कि 19 सितंबर को दोपहर 3.30 बजे तक एफआई आर आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुई थी। मिर्धा की ओर से आशंका जताई गई कि यदि उन्हें गिरफ्तार किया गया तो वे 21 सितंबर को होने वाले चेयरमैन चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
