पाड्या के नृत्य ने बांधा समां, ठाकुरजी मंदिर में झूमने को विवश हुए श्रद्धालु

पाड्या के नृत्य ने बांधा समां, ठाकुरजी मंदिर में झूमने को विवश हुए श्रद्धालु

कुसुमोत्सव पर महिलाएं भी थिरकने से नहीं रोक पाई स्वयं को

जोधपुर, शहर में खचाखच भरे मंदिर में सफेद वस्त्र लाल टोपी में चमकीली तुर्रियों के लटके, फूल मालाओं और गहनों से लदे पाड्या के वेश में गंगश्याम मंदिर के पुजारी पुरुषोत्तम शर्मा जैसे ही नृत्य शुरु किया तो माहौल भक्तिमय हो गया। शहर के गंगश्याम जी मंदिर में रात में पांड्या नृत्य के बाद कुसुमोत्सव का समापन हुआ। कोरोना काल में दो वर्ष के बाद शहरवासियों ने इस आयोजन के आनंद को फिर से महसुस किया। हजारों की संख्या में भक्तगण मंदिर पहुंचे।

मंदिर के चौगान के अलावा छत पर भी भक्तों की भीड़ रही। बसंतपंचमी से शुरू हुए रंगों के उत्सव कल रंगपंचमी पर पांड्या नृत्य के साथ थमा। दिन में रंगपंचमी पर केसर की होली खेली गई। कुसुमोत्सव के दौरान हर रोज शाम को मंदिर परिसर में होरियों का आयोजन हुआ।

श्याम भजनों पर झूमे श्रद्धालु

रंग पंचमी पर ठाकुर जी के संदेश वाहक पाड्याजी के नृत्य में भक्त भी श्याम भजनों पर झूम उठे। रंग पंचमी के दूसरे दिन आज से चैत्र भजनों की शुरुआत हुई। आज ठाकुरजी को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। इधर भीतरी शहर में इन दिनों गवर पूजन भी चल रहा है।

छोटी गंवर की पूजन कर रही महिलाएं

महिलाएं छोटी गंवर की पूजा करने में समय बिता रही हैं। नव विवाहिताएं व कुंवारी कन्याएं भी गवर पूजन में व्यस्त हैं। होली की दूसरे दिन से गणगौर पूजन भी शुरु हो चुका है। ईसर गवर की पूजा महिलाएं ग्रुप में करती हैं। शिव का प्रतीक ईसर व मां पार्वती के प्रतीक गंवर की पूजा सुहागिनें व कुंवारी कन्या कर रही हैं।

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