बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ जल की उपलब्धता बनाए रखना बड़ी चुनौती- शेखावत

  • जायंट्स इंटरनेशनल के सम्मेलन में केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री का उद्बोधन
  • जायंट्स ने इस वर्ष जल पर काम करने का लिया संकल्प

जोधपुर, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत विश्व में तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है,लेकिन इस बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ जल उपलब्धता बनाए रखने की चुनौती बढ़ी है। इस चुनौती से निपटने के लिए सामाजिक संस्थाओं को अपनी भागीदारी बढ़ानी होगी। जल संरक्षण के भारत के पारम्परिक दर्शन से नई पीढ़ी को संस्कारित करना होगा।

शेखावत शनिवार को जोधपुर में जायंट्स वेलफेयर फाउंडेशन की मेज़बानी में आयोजित 47वें जायंट्स इंटरनेशनल कन्वेंशन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया में अनेक संस्कृ़तियां आई और काल के गाल में समाहित हो गई,लेकिन भारत की संस्कृति अमिट रही, क्योंकि इस सभ्यता में सेवा,सद्भावना और सहयोग के संस्कार समाहित थे। जिस सभ्यता में ये तीन संस्कार हों,वह कभी समाप्त नहीं हो सकती और जिस समाज में इन तीनों की कमी आ जाए, उस समाज में संघर्ष और शोषण शुरू हो जाता है।

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उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा के समय ही समाज का चरित्र उजागर होता है। कोरोना जैसी आपदा के दौरान जाइंट्स इंटरनेशल सहित अनेक संस्थाओं ने जिस तरह सेवा कार्य किया,उससे देश का कारोना के दौरान लॉकडाउन से उत्पन्न संकट से निपटने में सहायता मिली। शेखावत ने कहा कि देश तेज गति से बदल रहा है। देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने और सामर्थ्यवान बनाने के लिए सकारात्मक भूमिका में काम करने वाले नागरिकों की जरूरत है।

संपरिवर्तन के इस दौर में सबको अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। जो संस्था जितनी बड़ी,उसकी जिम्मेदारी उतनी ही बड़ी होगी। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता सेनानियों ने बलिदान कर जो यश हासिल किया। वही यश हम सब देश के प्रति अपने योगदान से हासिल कर सकते हैं।

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जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम की चिंता करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि प्रकृति के घटकों की सुरक्षा का भारत का दर्शन अनूठा था। पहले समाज में ऐसे संस्कार थे कि बिना कानून भी सारा समाज प्रकृति के घटकों की चिंता करता था। पूरा गांव गाय, गोचर और ओरण की चिंता करता था, लेकिन जब से लिखित कानून बना, हमारे संस्कारों का क्षरण होता गया और बाई प्रोडक्ट के रूप में हमें क्लाइमेंट चेंज का उपहार मिला।

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उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के मामले में भारत के पारम्परिक दर्शन को पूरी दुनिया की जरूरत है। देश की नई पीढ़ी को भी हम प्रकृति के घटकों के सरंक्षण की हमारी परम्पराओं के साथ जीना सिखाएं। नई पीढ़ी को इस दर्शन के साथ काम करने के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी सामाजिक संस्थाओं को लेनी चाहिए। इन संस्थाओं को पारम्परिक जलस्त्रोतों को पुनर्जीवित करने की जिम्मेदारी लेनी होगी।

शेखावत ने भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत आज विश्व में सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था है। कई देश जहां अपनी अर्थव्यवस्था को अभी प्री कोविड काल तक पहुंचाने के लिए जूझ रहे हैं, वहीं हम प्री कोविड काल से काफी आगे बढ़ गए हैं, लेकिन बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ ही जल की उपलब्धता जैसी कई चुनौतियां भी हैं। यदि इस ओर काम नहीं किया गया तो कहीं ऐसा नहीं हो कि सिंगापुर की तरह सीवेज के पानी को रिसाइकिल कर काम में लेना पड़े।

सम्मेलन में जोधपुर के पूर्व नरेश गज सिंह,सन्त मुनि चन्द्रप्रभ सागर, गीतकार मनोज मुंतशिर, जायंट्स की वर्ल्ड चेयरपर्सन सायना एनसी,निर्मल गहलोत,कन्वेंशन के चेयरमैन सोहन भूतड़ा, देवेन्द्र गेलरा सहित अनेक गणमान्य लोग, देशभर से आए जायंट्स के प्रतिनिधि मौजूद थे।

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