सकारात्मक सोच से ही जीवन को बनाया जा सकता है सफल-जस्टिस माथुर

सकारात्मक सोच से ही जीवन को बनाया जा सकता है सफल-जस्टिस माथुर

  • विवेकानंद जयंती पर “सकारात्मक जीवन-सकारात्मक ऊर्जा” विषय पर सेमिनार आयोजित
  • पूर्व मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और शिक्षाविद कुसुम भंडारी के सानिध्य में हुआ आयोजन
  • डॉ रीना भंसाली,डॉ अरविंद मालवीय और डॉ राम अकेला ने दिया व्याख्यान

जोधपुर,सकारात्मक सोच से ही जीवन को बनाया जा सकता है सफल-जस्टिस माथुर। सामाजिक संगठन सत्यमेव जयते सिटिजन सोसायटी द्वारा विवेकानंद जयंती के अवसर पर “सकारात्मक जीवन- सकारात्मक ऊर्जा” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन कर लोगों में बढ़ रही नकारात्मकता को नियंत्रित करने की ओर अपनी तरह का पहला आयोजन विशेष तौर पर युवाओं के लिए किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए पूर्व मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने कहा कि सकारात्मक सोच से किसी भी प्रकार की बाधाओं को पार किया जा सकता है और भविष्य को सुंदर बनाने के लिए देखे गए सपनों को साकार किया जा सकता है।

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कार्यक्रम के संयोजक विपिन पंवार ने बताया कि विवेकानंद जयंती के अवसर पर सत्यमेव जयते सिटिजन सोसायटी की ओर से एक होटल में सकारात्मक जीवन पर आधारित इस सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता सोसायटी की अध्यक्ष विमला गट्टानी ने की जबकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर मुख्य अतिथि थे। विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ कुसुमलता भंडारी थी।

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पंवार ने बताया कि इस दौरान सकारात्मक जीवन जीते हुए आम जन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाले मोटिवेशनल स्पीकर और कवि डॉ राम अकेला,मोटिवेटेड स्पीकर और मनोवैज्ञानिक डॉक्टर रीना भंसाली और आध्यात्मिक चिंतक डॉक्टर अरविंद मालवीय को उनके द्वारा अब तक दी गई सेवाओं के लिए एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया। मोटिवेशनल स्पीकर्स ने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करने के साथ बदलते हुए परिवेश में सहनशक्ति कम होने से लेकर नकारात्मक सोच के कारण पॉजिटिव एनर्जी के हावी होने के साथ साथ सकारात्मक जीवन जीने के तरीके पर व्याख्यान देने के अलावा आमजन के सवालों के जवाब भी दिए। इस अवसर पर पूर्व मुख्य न्यायाधिपति गोविंद माथुर ने विभिन्न उदाहरण देते हुए बताया कि कोई भी व्यक्ति अगर अपने मन में सकारात्मक ऊर्जा को अपनाने के साथ किसी भी कार्य को हाथ में लेकर पूरी कोशिश करे तो वह नाकाम हो ही नहीं सकता, शर्त यही होनी चाहिए कि वह पूरी निष्ठा और लगन से अपने कर्मों पर ध्यान दें और सहनशक्ति संयम और विवेक को अपनाते हुए अपने जीवन को आगे बढ़ाएं।

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कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय की कुलपति कुसुम लता भंडारी ने अपने जीवन के अनुभव शेयर करते हुए बताया कि किस तरह उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बीच चुनौतियों को स्वीकार किया और उसके अलावा खुद तो मुकाम पर पहुंची साथ ही अन्य नेत्रहीन और दिव्यांगों के लिए भी इस तरह के प्रयास किया कि लगभग 200 से अधिक दिव्यांग आज सरकारी नौकरी पा चुके हैं। इसीलिए सकारात्मक जीवन जीने के लिए संकल्प लेकर काम करने की आवश्यकता है।

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कार्यक्रम के प्रारंभ में अध्यक्ष विमला गट्टानी,सचिव चंद्रकिरण दवे, कोषाध्यक्ष सूरज गांग,एडवाइजरी बोर्ड के निदेशक मुकेश बंसल,पीपी व्यास व प्रवीण मेढ़ ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में सोसायटी की उपाध्यक्ष प्रीती कौशल, कार्यकारिणी सदस्य अश्विनी दास, सैयद अहमद,अंजू भाटी,रेणुका मालवीय मौजूद थे। इस अवसर पर कार्यक्रम पश्चात पौष बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

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