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28 साल से कार्यरत अस्थायी कर्मचारी को हाईकोर्ट से राहत

जेएनवीयू की विशेष अपील खारिज -नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त

जोधपुर(दूरदृष्टिन्यूज),28 साल से कार्यरत अस्थायी कर्मचारी को हाईकोर्ट से राहत। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय द्वारा अस्थायी कर्मचारी मुकेश गहलोत के नियमितीकरण संबंधी एकलपीठ के आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अपील रिट याचिका खारिज कर दी। इस फैसले से पिछले 28 वर्षों से विश्वविद्यालय में कार्यरत मुकेश गहलोत को राहत मिली है।

उनके नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा के संबंध में एकलपीठ द्वारा दिए गए आदेश प्रभावी बने हुए हैं। मामले के अनुसार, मुकेश गहलोत ने जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय में अपनी सेवाओं को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। इस पर न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने 16 नवंबर 2023 को फैसला सुनाते हुए कहा था कि प्रार्थी पिछले 25 वर्षों से विश्वविद्यालय में अस्थायी कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं। एकलपीठ ने उन्हें नियमित करने के आदेश दिए थे। उनकी सेवाएं समाप्त नहीं करने और उन्हें नौकरी से नहीं हटाने के संबंध में भी निर्देश दिए थे।

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इस मामले में मुकेश गहलोत की ओर से अधिवक्ता निखिल भंडारी ने पैरवी की थी। एकल पीठ के फैसले को चुनौती देते हुए जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में विशेष अपील रिट याचिका दायर की थी। विश्वविद्यालय ने एकल पीठ के आदेश को निरस्त करने की मांग की थी। खंडपीठ में सुनवाई के दौरान मुकेश गहलोत की ओर से अधिवक्ता निखिल भंडारी ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय से जुड़े ललित गहलोत प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने 20 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी थी। ऐसे में वर्तमान मामले में विश्वविद्यालय की विशेष अपील पर सुनवाई जारी रखने का औचित्य नहीं रह जाता।

इन तर्कों से सहमत होते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा ने विश्वविद्यालय की विशेष अपील रिट याचिका खारिज कर दी। इस निर्णय से मुकेश गहलोत को राहत मिली है तथा उनके नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा को लेकर एकलपीठ के आदेश बरकरार रहे हैं।