कोर्ट के आदेश के बावजूद नियुक्ति नही देने पर हाइकोर्ट ने माना गंभीर

कोर्ट के आदेश के बावजूद नियुक्ति नही देने पर हाइकोर्ट ने माना गंभीर

मूक बधिर विकलांग और तलाकसुदा महिला अभ्यर्थी का मामला

जोधपुर,कोर्ट के आदेश के बावजूद नियुक्ति नही देने पर हाइकोर्ट ने माना गंभीर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मूक बधिर विकलांग और तलाकसुदा महिला अभ्यर्थी को कोर्ट के आदेश के बावजूद नियुक्ति नही देने पर हाइकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि या तो पालना कर रिपोर्ट पेश कर दें,अन्यथा आयुर्वेद विभाग के निदेशक डॉ आनंद कुमार शर्मा आगामी पेशी पर उपस्थित होकर कारण स्पष्ट करें कि क्यों नहीं उनके विरुद्ध अवमानना कार्यवाही संस्थित कर दंडित किया जाए। अजमेर निवासी याची दीपिका कीर की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने पैरवी की।

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याची अन्य पिछड़ा वर्ग,बधिर विशेष योग्यजन और तलाकसुदा अभ्यर्थी ने आयुर्वेद नर्स-कम्पाउण्डर भर्ती 2021 में अपना आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया में भाग लेने के पश्चात आयुर्वेद विभाग ने अंतरिम वरीयता सूची जारी की लेकिन याची का नाम शामिल नही करने पर उसने हाइकोर्ट में रिट याचिका पेश की। याचिका में नोटिस जारी होने के पश्चात विभाग ने तुरत फुरत में 24.05.22 को नियुक्ति आदेश जारी कर 649 विज्ञापित पदों के विरुद्ध केवल 485 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी। याची के अधिवक्ता ने बताया कि आयुर्वेद विभाग और चयन एजेंसी ने विशेष योग्यजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों का बिल्कुल ही पालन नही किया।नियमानुसार विज्ञापित 649 पदों के विरुद्ध 6 पद मूक बधिर विशेष योग्यजन हेतू आरक्षित थे लेकिन विभाग ने केवल 03 मूक बधिर विशेष योग्यजन को ही नियुक्ति दी और याची की मेरिट नम्बर 04 है। रिट याचिका की सुनवाई के दौरान विभाग ने शपथपत्र पेश कर बताया था कि 01 पद अभी भी रिक्त है जिस पर याची को नियुक्ति दी जा सकती है।

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यद्यपि रिट न्यायालय ने माना कि विभाग का कृत्य स्पष्ट रूप से विशेष योग्यजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के विपरीत रहा है लेकिन विकलांग कोटे में एक पद रिक्त होने के कारण निर्णय 16.11.2022 से रिट याचिका स्वीकार करते हुए हाइकोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर भीतर समस्त परिलाभ सहित नियुक्ति देने का निर्णय दिया था। निर्णय हुए एक साल से भी ज्यादा हो जाने और पालना नही करने पर अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट के न्यायाधीश कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने आयुर्वेद विभाग, राजस्थान,अजमेर के निदेशक को सशर्त व्यक्तिश:तलब करते हुए अंतरिम निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी 2024 को होगी।

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