जोधपुर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाएं, लेकिन उनके गृहनगर जोधपुर में ही लोग उनकी इस अपील को अनसुना कर रहे हैं। जोधपुर में प्रशासन और चिकित्सा विभाग का फोकस सिर्फ पहली डोज लगाने पर ही केन्द्रित होकर रह गया है।
वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज लगवाने वाले लोगों की संख्या में जमीन आसमान का अंतर ही स्थिति को स्पष्ट कर रहा है। जोधपुर जिले में अब तक 13.32 लाख लोग वैक्सीन लगवा चुके है। इसमें से 11.19 लाख के पहली और सिर्फ 2.12 लाख लोगों ने ही दूसरी डोज लगवाई है।
पहली और दूसरी डोज के बीच बड़े अंतर का अधिकारियों के पास कोई सटीक जवाब नहीं है। उनका तर्क है कि लोग स्वयं ही आगे नहीं आ रहे है। वहीं दबी जुबान में स्वीकार भी करते है कि कई बार वैक्सीन की कमी भी रही।
सीएमएचओ डॉ. बलवंत मंडा का कहना है कि हमारा विभाग व प्रशासन लगातार लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित कर रहा है। दूसरी डोज लगवाने की पात्रता हासिल कर चुके लोगों को कभी मना नहीं किया गया। ऐसे लोगों को प्राथमिकता से वैक्सीन लगाई जा रही है। इसके बावजूद कम संख्या में लोग आगे आ रहे हैं इसका कोई स्पष्ट कारण कह पाना मुश्किल है।

जोधपुर के 85 हजार हेल्थ वर्करों को पहली डोज लग चुकी है। इनमेें से अब तक सिर्फ 27 हजार से कुछ अधिक लोगों ने ही दूसरी डोज लगवाई है। इसी तरह फ्रंट लाइन वर्कर इस मामले में अन्य समूह से काफी आगे चल रहे हैं। 33 हजार फ्रंट लाइन वर्करों में से 25 हजार से अधिक लोग दूसरी डोज लगवा चुके है। 60 वर्ष से अधिक आयु के करीब 2.80 लाख लोग वैक्सीन की पहली डोज लगवा चुके है। इनमें से सिर्फ 95 हजार के ही दूसरी डोज लग पाई है।

45 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 3.85 लाख लोग पहली डोज लगवा चुके हैं लेकिन दूसरी डोज लगवाने में यहां भी लोग पीछे है। इस आयु वर्ग के 3.32 लाख लोगों ने अभी तक दूसरी डोज नहीं लगवाई है। विशेषज्ञ बार-बार चेता रहे हैं कि कोरोना से बचाव के लिए दोनों डोज को समय पर लगवाना आवश्यक है। ताकि कोरोना के प्रति एंटी बॉडी शरीर में विकसित हो सके। इससे करोना से बचाव में काफी हद तक मदद मिलेगी। लेकिन लोगों ने सारी चेतावनियों को दरकिनार कर रखा हैं।
>>> आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय-गहलोत
