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आईएल-6 बायोमार्कर से फेफड़ों की सूजन का पता चला-डॉ. कच्छावा

जोधपुर,डॉ.एसएन मेडिकल कॉलेज त्वचा और एमडीआरयू विभाग ने आईसीएमआर-एनआईआईएच मुंबई के साथ संयुक्त सहयोग से चल रही स्क्लेरोडर्मा परियोजना को महत्वपूर्ण परिणाम के साथ पूरी करने में सफलता हासिल की है।

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डॉ.दिलीप कच्छावा ने बताया कि मरीजों को फेफड़ों में सूजन अधिक थी,जिसका पता आईएल-6 बायोमार्कर से चला। IL-6 एक बहुक्रियाशील बायोमार्कर साइटोकिन है जिसे सूजनरोधी प्रभाव के साथ तीव्र चरण प्रतिक्रिया में मुख्य मध्यस्थ के रूप में मान्यता प्राप्त है,जो IL-1 और TNF-α उत्पादन पर नियंत्रण रखता है।

डॉ.कच्छावा ने सिलिका परियोजना टीम डॉ.वंदनाप्रधान,वैज्ञानिक डी, आईसीएमआर-एनआईआईएच, मुंबई,डॉ.प्रभुप्रकाश,नोडल अधिकारी,एमडीआरयू ,एसएन मेडिकल कॉलेज,डॉ.श्वेता माथुर, वैज्ञानिक,एमडीआरयू ,एसएन मेडिकल कॉलेज,दिव्यांशु तंवर, प्रयोगशाला तकनीशियन, एमडीआरयू को उत्कृष्ट प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।

डॉ.कच्छावा ने बताया कि आईसीएमआर द्वारा वित्त पोषित एक और नई परियोजना जिसमें इरास्मस सिंड्रोम और इडियोपैथिक सिस्टमिक स्केलेरोसिस सिंड्रोम को अलग करने के लिए जीन Notch3 T6746c पर अध्ययन होगा। त्वचा विभाग और एमडीआरयू जल्द ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करेंगे। त्वचा विभाग से डॉ.कच्छावा,डॉ. पंकज राव,एमडीआरयू से डॉ.प्रभु प्रकाश और डॉ. श्वेता माथुर काम करेंगे।

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