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“जो कोई पढ़े हनुमान चालीसा”

संस्कृति

-पार्थसारथि थपलियाल

हनुमान भारतीय संस्कृति में उन सात महान पुरुषों में से एक हैं जिन्हें चिरंजीवी होने का वरदान है। ये हैं- अश्वत्थामा, राजा बलि, वेदव्यास, कृपाचार्य, विभीषण, हनुमान और परशुराम ये सभी चिरजीवी हैं। इनमे से हनुमान को रुद्रावतार माना जाता है। हनुमान को अंजनिपुत्र, केसरी नंदन,पवनपुत्र आदि नामों से भी जाना जाता है। माता अंजना का विवाह केसरी राज के साथ हुआ था। विवाह के कई वर्षों तक संतान सुख न मिलने पर अंजना जी ने मतंग ऋषि के पास जाकर अपने मन की बात बताई। कहा। इसी क्रम में एक दिन वायुदेव प्रसन्न होकर प्रकट हुए और अंजनामतंग ऋषि ने उन्हें वायु देव की तपस्या करने पर वरदान दिया कि आपकी मनोकामना पूर्ण होगी। मैं स्वयं आपके पुत्र के रूप में आऊंगा।

वही हनुमान जो किष्किंधा पर्वत पर भगवान राम को मिले और माता सीता की खोज में राम भक्त बने। वही हनुमान जो इन दिनों अपनी चालीसा के कारण समाज मे वानरवृति का समावेश किये हुए हैं। अजान का लाउडस्पीकर कम करने को लेकर, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) सुप्रीमो राज ठाकरे की इस घोषणा के बाद कि मस्जिदों से अजान की आवाज़ यदि कम न की गई तो उनकी पार्टी 3 मई के बाद सड़कों पर उतर कर हनुमान चालीसा लाउडस्पीकर के माध्यम से पढ़ेंगे। इसके पक्ष विपक्ष में आवाज़ें तेज़ हुई। अमरावती की निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और उनके विधायक पति रवि राणा ने शिवसेना प्रमुख के घर के सामने हनुमान चालीसा पढ़ने का बयान दे डाला। शिव सेना को जानना हो तो उसके नेता संजय राउत को जान लीजिए। हुआ ये कि राणा दंपत्ति अमरावती से मुम्बई पहुँचे भी नही थे कि उनके घर के बाहर सैकड़ों शिव सैनिक विरोध में प्रदर्शन करने लगे। प्रकरण आगे बढ़ा। मुम्बई पुलिस ने इस दंपत्ति को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। विवाद हनुमान चालीसा पढ़ने को लेकर शुरू हुआ और पुलिस ने उन्हें जेल पहुंचा दिया। हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास जी ने जेल में लिखी थी।

गोस्वामी तुलसीदास जब रामचरितमानस लिख चुके थे तो यह प्रसिद्ध हो चुका था कि भगवान राम तुलसीदास जी को दर्शन देते हैं। बादशाह अकबर के मन में भी आया कि वह भी भगवान के दर्शन करे। तुलसी दास जी को बुलाया गया। बादशाह ने कहा क्या वास्तव में तुमने भगवान को देखा है? तुलसी दास बोले हाँ। क्या तुम अपने भगवान के दर्शन हमें करवा सकते हो? तुलसीदास जी ने कहा- भगवान सिर्फ भक्तों को ही दर्शन देते हैं। अकबर को बहुत गुस्सा आया। उसने तुलसीदास को फतेहपुर की जेल में बंद करवा दिया।

एक किंवदंती यह भी है कि अकबर ने तुलसीदास जी से कहा जैसा ग्रंथ तुमने राम पर लिखा है वैसा हमारे ऊपर भी लिख दो। तुलसीदास जी ने मना कर दिया। अकबर ने उन्हें कैद में डाल दिया। यहीं जेल में तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा लिखी थी। जैसे ही हनुमान चालीसा पूरी हुई वैसे ही फतेहपुर सीकरी में बंदरों के दल न जाने कहाँ से कूदते फांदते उत्तर आये। बंदरों ने चारों ओर उत्पात मचाने शुरू कर दिया। कुछ लोग बादशाह अकबर के पास गए और अर्ज किया कि बादशाह सलामत! शहर की खैर चाहते हो तो तुलसीदास जी को रिहा कर दो। नही तो ये बंदर बहुत नुकसान पहुंचाएंगे। बादशाह ने रिहा करने का हुक्म दिया। वैसे ही बंदर अदृश्य होते चले गए।

हनुमान चालीसा में आरम्भ व अंत में दोहे और बीच में 40 चौपाइयां हैं। 40 चौपाइयां केवल हनुमान जी के व्यक्तित्व, कृतित्व उन्हें प्राप्त सिद्धियों, और महिमा को समर्पित हैं। इसीलिए इन पदों को हनुमान चालीसा कहा गया है। भारत में साहित्यकारों ने कई लेखन संस्कार विकसित किये। इनमें पच्चीसी, बत्तीसी, चालीसा, शतक, सप्तसती, सतसई आदि आदि हैं। हनुमान चालीसा हसनुमान जी की एक ऐसी स्तुति है जिसे कोई भी पढ़ सकता है, कहीं भी और कभी भी पढ सकता है। “जो यह पढ़े हनुमान चालीसा” इस चौपाई में स्पष्ट है। अत्यंत कष्टकारक स्थितियों में 7 बार पढ़ने का उपाय भी इसी में बताया गया है। हनुमान चालीसा को भक्ति भाव से पढ़ने पर इसका प्रभाव दिखाई देता है। यह सर्वकालिक सिद्ध है।

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