दान में मिले 10 कैडवर पर 50 से अधिक सर्जनों ने सीखी जटिल पेल्विएसीटैबुलर सर्जरी
कैडवेरिक कोर्स के दूसरे दिन मिनिमली इनवेसिव एवं पर्क्यूटेनियस तकनीकों का विशेषज्ञों ने किया प्रत्यक्ष प्रदर्शन
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),दान में मिले 10 कैडवर पर 50 से अधिक सर्जनों ने सीखी जटिल पेल्विएसीटैबुलर सर्जरी। डॉ.एसएन मेडिकल कॉलेज,जोधपुर में आयोजित राजस्थान पेल्विएसीटैबुलर कैडवेरिक ट्रॉमा कोर्स के दूसरे दिन रविवार को 10 अलग-अलग दान किए गए कैडवरिक स्टेशनों पर पेल्विस एवं एसीटैबुलम की जटिल सर्जरी का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
देशभर से आए 50 से अधिक युवा ऑर्थोपेडिक सर्जनों ने इन जटिल ऑपरेशन की आधुनिक तकनीकों के बारीक गुर एवं टिप्स सीखे।कार्यक्रम में विशेष रूप से मिनिमली इनवेसिव एवं पर्क्यूटेनियस सर्जरी की तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया। इमेज इंटेंसिफायर की सहायता से कम से कम चीरे एवं कम ऊतक क्षति के साथ मरीज को बेहतर संभव परिणाम देने वाली आधुनिक तकनीकों को समझाया गया।
झण्डारोहण के साथ प्रारंभ हुआ चालिहा महोत्सव
पहला लाइव कैडवेरिक प्रदर्शन प्रो.रमेश सेन, पीजीआई चंडीगढ़ ने किया। इसके बाद प्रो. विवेक त्रिखा,एम्स नई दिल्ली,डॉ.प्रणव शाह, मेरिंगो सीआईएमएस अस्पताल,अहमदाबाद तथा प्रो.अभय एल्हेंस ने क्रमशः जटिल पेल्विएसीटैबुलर एवं मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल तकनीकों का प्रदर्शन किया।
इसके पश्चात सभी प्रतिभागियों ने कैडवर पर स्वयं हाथों से विभिन्न शल्य प्रक्रियाओं का अभ्यास किया। वरिष्ठ विशेषज्ञ फैकल्टी ने प्रत्येक प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी करते हुए प्रतिभागियों को उचित दिशा-निर्देशन एवं मार्गदर्शन दिया। इसमें एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर, महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज जयपुर तथा राजस्थान के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों ने सहयोग किया।
डॉ.एसएन मेडिकल कॉलेज की ओर से डॉ. रामा किशन चौधरी,डॉ. निरोत्तम सिंह,डॉ.मुकेश सैनी एवं डॉ.देवेंद्र सिंह गोदारा ने प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन में सक्रिय भूमिका निभाई।
दानदाताओं के प्रति जताया सम्मान
आयोजन सचिव डॉ.रामा किशन चौधरी ने कहा कि शरीर रचना विज्ञान एवं अस्थि रोग विभाग उन महान दानदाताओं के प्रति हृदय से कृतज्ञ हैं, जिन्होंने अपने शरीर का दान कर चिकित्सा शिक्षा एवं शल्य कौशल को आगे बढ़ाने का महान योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इन दानदाताओं का महान त्याग आने वाली पीढ़ियों के हजारों मरीजों के बेहतर उपचार का आधार बनेगा।
कैडवेरिक प्रयोगशाला में इस विशेष प्रशिक्षण के लिए उचित प्रकाश व्यवस्था,आधुनिक उपकरणों एवं पेल्विएसीटैबुलर सर्जरी में आवश्यक सभी इंस्ट्रूमेंट्स की विशेष व्यवस्था की गई थी।
आयोजन अध्यक्ष एवं ऑर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष प्रो.अरुण वैश्य तथा प्रो.लीना रायचंदानी पूरे कैडवेरिक कोर्स के दौरान सक्रिय रूप से जुड़े रहे और प्रशिक्षण की लगातार निगरानी की। उन्होंने सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
डॉ.मुकेश असवाल ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल की ओर से दोनों दिनों के कार्यक्रम का पर्यवेक्षण किया तथा इसकी रिपोर्ट राजस्थान मेडिकल काउंसिल को प्रस्तुत करेंगे।
नियमित रूप से होने चाहिए ऐसे प्रशिक्षण
मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रो.एमके आसेरी ने कहा कि इस तरह के समर्पित एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए,ताकि ऑर्थोपेडिक सर्जनों की जटिल सर्जरी संबंधी विशेषज्ञता और कौशल को लगातार बेहतर बनाया जा सके।
प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. बीएस जोधा ने सभी राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय फैकल्टी,प्रतिभागियों, ऑर्थोपेडिक्स एवं एनाटॉमी विभाग तथा आयोजन टीम को सफल आयोजन के लिए बधाई दी और धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने विशेष रूप से आयोजन सचिव डॉ. रामा किशन चौधरी के समर्पित प्रयासों की सराहना की।
आयोजन सचिव डॉ. रामा किशन चौधरी ने सभी राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फैकल्टी ने अपना बहुमूल्य समय देकर युवा सर्जनों को जटिल सर्जरी की बारीकियां सिखाईं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की समर्पित सीखने की भावना की सराहना की।
उन्होंने एनाटॉमी कैडवेरिक लैब के कर्मचारियों, मेडिकल कॉलेज के सहयोगी स्टाफ,सर्जिकल एवं फार्मा कंपनियों, तकनीकी एवं लॉजिस्टिक टीम, सफाईकर्मियों तथा मल्टीटास्किंग स्टाफ का भी विशेष आभार व्यक्त किया,जिनके अथक सहयोग से यह आयोजन सफल हो सका।
दो दिवसीय पाठ्यक्रम का समापन ज्ञान,कौशल, समर्पण और उन महान देहदाताओं के प्रति कृतज्ञता के भाव के साथ हुआ,जिनके सर्वोच्च त्याग से चिकित्सा की नई पीढ़ी सीख रही है।
