जलझूलनी एकादशी पर बहनों ने लिया जल संरक्षण का संकल्प
- पूंजला नाड़ी में हुआ समंद महोत्सव
- महिलाओं ने निभाई वर्षों पुरानी परंपरा
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),जलझूलनी एकादशी पर बहनों ने लिया जल संरक्षण का संकल्प। जलझूलनी एकादशी के अवसर पर श्रीसैनिक क्षत्रिय पूंजला नाड़ी संरक्षण एवं पर्यावरण विकास संस्था की ओर से पूंजला नाड़ी में पारंपरिक समंद महोत्सव का आयोजन किया गया।
इस दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग एकत्रित हुए और वर्षों पुरानी जल संरक्षण की परंपरा का निर्वहन किया।महोत्सव में आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों महिलाएं सिर पर सजे-धजे कलश लेकर पारंपरिक मारवाड़ी वेशभूषा में मंगल गीत गाते हुए नाड़ी पर पहुंचीं। नाड़ी पर महिलाओं ने अनुशासन के साथ कतार में खड़े होकर एक-दूसरे के आने का इंतजार किया। गांव की सबसे बड़ी बहू इस परंपरा में सबसे आगे रही।
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परंपरा के अनुसार महिलाओं ने नाड़ी के चार फेरे लगाए। इस दौरान पुरुष,बच्चे और अन्य लोग एक तरफ बैठकर आयोजन में सहयोग करते रहे। महिलाओं के चार फेरे पूरे होने के बाद भाई अपनी बहनों के साथ नाड़ी पर पहुंचे। ढोल-नगाड़ों के बीच भाई-बहनों ने नाड़ी के पानी में कलश को हिलोरें दिलाईं और एक-दूसरे को पानी पिलाकर जल संरक्षण का वचन लिया।
भाई ने बहन को ओढ़ाई चुनरी
जल में कलश हिलोरने के बाद भाई-बहनों ने एक- दूसरे को हाथ से नाड़ी का पानी पिलाया। इसके बाद भाई ने अपनी बहन को नई चुनरी ओढ़ाई। ससुराल पक्ष की ओर से भाई को नेग के रूप में राशि दी गई। बहनें भी अपने भाइयों के लिए घर से बनाकर लाई गई घुधरी लेकर पहुंचीं।
ठाकुरजी को करवाया स्नान
संस्थान के सयोजक जगदीश देवड़ा ने बताया कि देवझूलनी ग्यारह के उपलक्ष में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्राम पूंजला व ग्राम अन्नासागर के ठाकुरजी महाराज की पालकी में बिठाकर स्नान करने के लिए लाया गया।
ढोल-नगाड़ों की बीच ठाकुरजी के स्नान के पश्चात् आरती की गई और सूर्यास्त के पूर्व कान्हाजी की पालकी पुन: मंदिर की तरह प्रस्थान कर गई।
