देश के पहले वंदे भारत स्लीपर मेंटेनेंस डिपो का 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा

  • रेलवे आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम
  • एक साथ तीन ट्रेनों के रखरखाव की होगी सुविधा

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),देश के पहले वंदे भारत स्लीपर मेंटेनेंस डिपो का 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा। भारतीय रेलवे की आधुनिक रेल परियोजनाओं के तहत जोधपुर में विकसित किए जा रहे देश के पहले वंदे भारत स्लीपर मेंटेनेंस डिपो के निर्माण के प्रथम चरण का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। करीब 360 करोड़ रुपए की लागत से विकसित यह परियोजना भविष्य में वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित होने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि डिपो को वंदे भारत स्लीपर सेवाओं की भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। यहां 24 कोच वाली पूर्ण ट्रेन के रखरखाव की सुविधा उपलब्ध होगी तथा एक समय में तीन ट्रेनों का निरीक्षण एवं मेंटेनेंस किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण का कार्य 80 प्रतिशत तक पूर्ण हो चुका है,जबकि दूसरे चरण की टेंडर प्रक्रिया जारी है और शीघ्र निर्माण कार्य शुरू किए जाने की तैयारी है।

उन्होंने बताया कि पहले चरण में छह सौ मीटर लंबे शेड और निरीक्षण पिट का निर्माण पूरा किया जा चुका है,जबकि पिट के बीच प्लेटफॉर्म,ड्रेनेज व अन्य कार्य प्रगति पर हैं। डीआरएम के अनुसार डिपो में अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं,जिनमें इंस्पेक्शन पिट्स, सिंक्रोनाइज्ड लिफ्टिंग सिस्टम,ड्रॉप पिट टेबल, पिट व्हील लेथ,ऑटोमेटेड वॉशिंग सिस्टम तथा व्हील एवं बॉगी मेंटेनेंस की सुविधाएं शामिल हैं।

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इससे रखरखाव प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित,सुरक्षित और समयबद्ध हो सकेगी। वंदे भारत स्लीपर सेवाओं के विस्तार के साथ जोधपुर का यह डिपो भारतीय रेलवे के आधुनिक मेंटेनेंस नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

दूसरे चरण में बनेगा अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र
करीब 30 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित इस परियोजना के दूसरे चरण में अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र एवं सिमुलेटर रूम स्थापित किए जाएंगे,जहां कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा।

रेल प्रशासन के अनुसार परियोजना पूर्ण होने पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की परिचालन दक्षता और रखरखाव क्षमता को मजबूती मिलेगी। साथ ही रोजगार,स्थानीय आर्थिक गतिविधियों तथा रेलवे अवसंरचना विकास को भी गति मिलने की संभावना है।