90वीं वर्षगांठ पर आकाशवाणी ने आयोजित किया रंगारंग कार्यक्रम

नई दिल्ली(दूरदृष्टीन्यूज), 90वीं वर्षगांठ पर आकाशवाणी ने आयोजित किया रंगारंग कार्यक्रम। ऑल इंडिया रेडियो के व्यवस्थित प्रसारण के 90 वर्ष पूरे होने के अवसर आकाशवाणी के रंग भवन सभागार में “स्पेक्ट्रम” नाम से सोमवार को एक रंगारंग सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया।

इस मनमोहक,शानदार सांस्कृतिक आयोजन को आकाशवाणी दिल्ली की ओर से आयोजित किया गया। आयोजन में मुख्य अतिथि थे प्रसार भारती के अध्यक्ष और सुप्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी, विशिष्ट अतिथि थे प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी।

सांस्कृतिक समारोह का आरंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। दीप प्रज्ज्वलन प्रसार भारती के अध्यक्ष प्रसून जोशी व उनके साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी,प्रसार भारती गौरव द्विवेदी,आकाशवाणी व दूरदर्शन के महानिदेशक राजीव जैन,उप महानिदेशक (अभियांत्रिकी) जितेंद्र पुरुथि,उपमहानिदेशक (कार्यक्रम) जितेंद्र कटारा, आकाशवाणी दिल्ली की कार्यक्रम प्रमुख मनीषा जैन और सहायक निदेशक कार्यक्रम प्रमोद कुमार वत्स ने किया।

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स्पेक्टम के आरम्भ में प्रसार भारती के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि ऑल इंडिया रेडियो ने संस्कृति का जो बीजारोपण 90 वर्ष पूर्व किया था,उसने भारतीय संस्कृति और सभ्यता को जो योगदान दिया वह अनिर्वचनीय है।

वाचिक परंपरा को 90 वर्षों तक सजीव रखना,बहुत कठिन कार्य है। हमारी संस्कृति को, कलाकारों को, लोकगीतों को बचाये रखने का महनीय कार्य आकाशवाणी ने किया है। समय बदला है,समाज बदला है,आज आकाशवाणी के सामने अपनी स्थिति को बचाये रखने की चुनौती बाहें फैलाई हुई है। रेडियो ब्रॉडकास्टर्स को इस चुनौती का मार्ग स्वयं निर्धारित करना है। इस क्रम में प्रसून जोशी ने अपनी प्रसिद्ध कविता वृक्ष भी सुनाई।

सांस्कृतिक कार्यक्रम का आरंभ नाद @ 90 वाद्यवृंद; गुरु वंदना के साथ शुरू हुआ। सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा की धुन पर जब मृदंगं,सरोद,सितार, सारंगी,बांसुरी,तबला और की बोर्ड पर भारत के विभिन्न भागों से आमंत्रित प्रतिष्ठित कलाकारों ने सुर-लय और ताल का अद्भुत समां बांधा।

अगली बंदिश राग देस पर आधारित थी। वाद्यवृंद आयोजन में गुरु वंदना में स्वर था जयंत पांडे का। वाद्ययंत्रों पर अपने जादुई हुनर को दिखा रहे थे सुधीर चट्टोपाध्याय बांसुरी पर, फारूख लतीफ़ खां और दिलशाद अहमद सारंगी पर,मुकेश शर्मा और दानिश असलम सरोद पर, उस्ताद शफीक खां सितार पर,पं.सतलिंगप्पा और अदनान खान तबले पर, पी.रवि शंकर और पी जय भास्कर मृदंग पर और की बोर्ड पर मनीष प्रभाकर।

रंग पंजाबी के अंतर्गत पंजाब से आमंत्रित सूफी संगीत को प्रस्तुत करनेवाल याकूब गिल और पार्टी ने अपने सूफी कलामों के साथ एक अलग फ़िज़ा पैदा कर दी। लाज मेरी पत रखियो भला झूलेलालन.. को जब युवा,सूफी कलाकार याकूब गिल और पार्टी ने गाना शुरू किया रंगभवन सभागार में खचाखच भरे श्रोताओं ने कलाकारों का साथ दिया। सभी ने इस युवा कलाकार को सराहा।

यूथ वाइब्स के अंतर्गत युवाओं में बेहद लोकप्रिय युवा कलाकार नेहा वत्स खंखरियाल जैसे मंच पर आई,दर्शकों ने ताली बजाकर उनका स्वागत किया। नेहा ने बॉलीवुड की फिल्मों के एक से बढ़कर एक लोकप्रिय गीतों को उन्होंने अपने सुरीले अंदाज़ में गाया।

कुछ गीतों के बोल पढ़िये-जब दीप जले आना…एहसान तेरा होगा मुझपर…मांग के साथ तुम्हारा मैंने….ये शाम मस्तानी…मेरे सामने वाली खिड़की..ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे…तेरे जैसे यार कहां.. ये देश है वीर जवानों का.. जैसे अनेक गाने गाकर नेहा ने दर्शकों की वाहवाही खूब लूटी।

मरु तरंग के अंतर्गत अपने समय की जानी-मानी कालबेलिया नृत्यांगना गुलाबो देवी और उनकी पार्टी ने राजस्थानी रंगों को ख़ूब बिखेरा। चरी नृत्य, पणिहारी,घूमर,भवाई और कालबेलिया नृत्य प्रस्तुत किया। स्पेक्ट्रम समग्र रूप से एक सफल आयोजन रहा।

व्यवस्थित रेडियो प्रसारण के 90 वर्ष होने पर आकाशवाणी द्वारा आयोजित इस आयोजन में संगीत पक्ष को देख रहे थे सहायक निदेशक स्पर्शिता श्रीवास्तव और अनुराग उपाध्याय उनके सहयोगी थे कार्यक्रम अधिशासी सचिन कुमार प्रदीप अग्रवाल। मंच संचालन कर रहे थे मुनीश जौली और नीलम मलकानिया।

(रिपोर्ट-पार्थसारथि थपलियाल)