एनएसएस शिविर में सीपीआर प्रशिक्षण
सिखाई जीवन बचाने की तकनीक
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),एनएसएस शिविर में सीपीआर प्रशिक्षण। कृषि महाविद्यालय में 7 दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) विशेष शिविर के अंतर्गत विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों के लिए जीवनरक्षक तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण डीन एवं फैकल्टी चेयरमैन डॉ. जेआर वर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रख्यात चिकित्सक डॉ.राजेंद्र टाटेर ने प्रतिभागियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने के तरीकों की विस्तृत जानकारी दी।
डॉ.राजेंद्र तातेड़ ने सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) की सही तकनीक का प्रायोगिक प्रदर्शन करते हुए बताया कि अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में समय पर दिया गया सीपीआर किसी भी व्यक्ति की जान बचा सकता है।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अब तक वे सीपीआर तकनीक के माध्यम से लगभग 100 लोगों का जीवन बचा चुके हैं तथा विद्यार्थियों,स्वयं सेवकों, विभिन्न विभागों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 500 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं।
सीपीआर के अलावा प्रशिक्षण में पानी में डूबने की स्थिति में बचाव के उपाय,किसी बच्चे द्वारा सिक्का या अन्य वस्तु निगल लेने की स्थिति में प्राथमिक सहायता, भगदड़ में दम घुटने की स्थिति में क्या करना चाहिए जैसी महत्वपूर्ण जीवन रक्षक गतिविधियों की भी जानकारी दी गई।
प्रतिभागियों को इन सभी परिस्थितियों में तुरंत और सही प्रतिक्रिया देने के तरीके प्रायोगिक रूप से समझाए गए। डॉ. जेआर.वर्मा ने कहा कि सीपीआर जैसी जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी आज के समय में हर विद्यार्थी और नागरिक के पास होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी आपात स्थिति में यदि आसपास मौजूद लोग तुरंत सीपीआर देना जानते हों तो कई अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को समाज में फैलाएं और लोगों को जागरूक करें। इस अवसर पर डॉ.महेन्द्र कुमार ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण युवाओं को समाज के प्रति जागरूक बनाते हैं और आपात कालीन स्थितियों में दूसरों की सहायता करने के लिए सक्षम बनाते हैं।
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कैम्प कोऑर्डिनेटर डॉ.केके सैनी ने डॉ.राजेंद्र टाटेर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एनएसएस का उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को जीवन रक्षक कौशल सिखाने के साथ-साथ समाज के लिए उपयोगी बनने की प्रेरणा देते हैं।
