आफ़री में 5 दिवसीय पुनश्वर्या प्रशिक्षण का शुभारम्भ

आफ़री में 5 दिवसीय पुनश्वर्या प्रशिक्षण का शुभारम्भ

भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए हुआ पुनश्चर्या कार्यजर्म

जोधपुर,आफ़री में 5 दिवसीय पुनश्वर्या प्रशिक्षण का शुभारम्भ। पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार की ओर से भावाअशिप शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी),जोधपुर में 18 से 22 दिसम्बर को भारतीय वन सेवा अधिकारियों हेतु 5 दिवसीय पुनश्वर्या प्रशिक्षण “इंटीग्रेटेड एप्रोच फॉर सस्टेनएबल डेवलपमेंट ऑफ़ फ्रजाइल डेजर्ट इकोसिस्टम” विषय पर आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण उद्घाटन कार्यक्रम के आरम्भ में आफरी निदेशक एमआर बालोच, भावसे एवं डॉ.तरुण कान्त,पाठ्यक्रम निदेशक ने मुख्य अतिथि अमित सहाय,भावसे पूर्व वन प्रधान,असम एवं प्रशासनिक सदस्य,केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण,जोधपुर तथा विशिष्ट अतिथि,सुरेश पन्त, आईऍफ़एस मैनेजिंग डायरेक्टर, ऍफ़डीसीएल उड़ीसा एवं सुविना ठाकुर एआईजीआरटी वन,पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन,भारत सरकार का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया।

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आफरी निदेशक बालोच ने अपने स्वागत उद्बोधन में देश भर से आए वन सेवा अधिकारियों का स्वागत करते हुए संस्थान द्वारा मरुस्थल स्थिरीकरण,जैव तकनीकी,जैव विविधता संरक्षण,जैव कीटनाशक, लूणी नदी के पुनरुद्धार,पचपदरा रीफाइनरी,शीशम क्लोन की उन्नत किस्में एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विभिन्न कार्यों को बताया। डॉ.तरूण कान्त,समूह समन्वयक (शोध) एवं पाठ्यक्रम निदेशक ने प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं पाठ्यक्रम का विस्तृत परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने पाठ्यक्रम सामग्री का विमोचन किया।

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मुख्य अतिथि अमित सहाय ने जलवायु परिवर्तन में वानिकी के योगदान को समझाते हुए कार्बन स्थरीकरण में सतत काष्ठ उत्पादन प्रक्रिया से पारिस्थितिकी तंत्र के सतत विकास में इसकी महत्ता को बताया। विशिष्ट अतिथि,सुरेश पन्त ने वानिकी क्षेत्र में अपने अनुभवों को साझा किया। सुविना ठाकुर ने अपने उद्बोधन में प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम को प्रतिभागियों के लिए उपयोगी बताया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देशभर के 13 कैडर से आये 26 वन सेवा के अधिकारी भाग ले रहें हैं। उद्घाटन सत्र का मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन अंजली जोशी,वैज्ञानिक बी ने किया। कार्यक्रम में आफरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक,अधिकारी एवं अन्य विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। तकनीकी सत्र में डॉ.तरूण कान्त, समूह समन्वयक शोध,आफरी; डॉ. एलएन हर्ष,पूर्व कुलपति,जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय;आरएल मीणा,भावसे (सेवानिवृत्त) तथा एमएल सोनल, भावसे (सेवानिवृत्त) आदि विषय विशेषज्ञों ने प्रशिक्षणार्थियों को व्याख्यान दिया।

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