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एन्जियोग्राफिक विधि से हृदय वाल्व के 4 सफल प्रत्यारोपण

उत्तर भारत का पहला राज्य जहां सरकारी अस्पताल में एक साथ चार मरीजों का सफल टावी किया गया

जोधपुर,एन्जियोग्राफिक विधि से हृदय वाल्व के 4 सफल प्रत्यारोपण।
मथुरादास माथुर अस्पताल के हृदय रोग विभाग में एन्जियोग्राफिक विधि (टावी) से हृदय वाल्व प्रत्यारोपण ,डज़के चार सफल प्रोसिजर्स गुरुवार को किये गए। मथुरादास माथुर चिकित्सालय के हृदय रोग विभाग में हाल ही में टावी विधि से वाल्व का प्रत्यारोपण प्रारंभ किया गया है। इसी क्रम में गुरुवार चार रोगियों के हृदय वाल्व का प्रत्यारोपण कर राहत प्रदान की गई। यह पहली बार है कि उत्तर भारत के किसी राज्य के सरकारी अस्पताल में एक साथ चार मरीजों का सफल टावी प्रोसीजर एक ही दिन में किया गया हो। इस प्रक्रिया में डॉ रोहित माथुर,डॉ.पवन सारडा,डॉ.अनिल बारूपाल,डॉ राकेश कर्नावट,डॉ शिखा,डॉ गायत्री,वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी महेन्द्र व्यास,हरीश पंवार,नंदकिशोर, करूणा,हेमलता, योगेश कुमार,नवीन गोयल,सिमला, प्रीति,अशोक,बंशीलाल,रीटा,जितेंन्द्र सिंह,जितेंद्र डूडी समस्त कैथलेब स्टाफ एवं कैथलेब टेक्निशियनों का योगदान रहा।

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एमडीएमएच के अधीक्षक डॉ.विकास राजपुरोहित ने बताया कि चारों रोगियों का उपचार आरजीएचएस स्कीम में पूर्णतया निःशुल्क किया गया जिसकी कुल लागत लगभग 56 लाख रुपए थी। डॉ.संपूर्णानन्द मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.दिलीप कच्छवाहा ने हृदय रोग विभाग को बधाई देते हुए बताया कि हृदय रोग विभाग निरंतर नवाचार तथा उच्च श्रेणी के ऑपरेशन करके रोगियों को राहत प्रदान करने में अग्रणी रहा है।

चौपासनी रोड निवासी 69 वर्षीय महिला पूर्व में उच्च रक्तचाप से ग्रसित थी जो श्वास में तकलीफ के साथ एमडीएम में दाखिल हुई,इन्हें दमे की भी दिक्कत थी। जैसा की महिला ने बताया कि उन्हें मल में रक्त आने की भी समस्या थी। इनकी विस्तत जाँच पड़ताल के बाद,हृदय वाल्व में गम्भीर सिकुडन (Stenosis) का पता चला। इसके बाद हृदय रोग विशेषज्ञ टीम ने वाल्व बदलने का निर्णय लिया लेकिन ऑपरेशन के दौरान होने वाली सम्भावित जटिलताओं को देखते हुए बिना चीर फाड के टावी को उचित समझा तथा 17 अगस्त को सफल टावी किया गया। अभी महिला स्वस्थ है।जसवन्त नगर नागौर निवासी 79 वर्षीय महिला पिछले 5-6 वर्षों से छाती में दर्द व श्वास की तकलीफ़ के कारण एमडीएम में भर्ती हुई। इनकी विस्तृत जाँच करने पर हृदय वाल्व की सिकुड़न की समस्या का पता चला। अधिक उम्र होने के कारण हृदय टीम द्वारा टावी करने का निर्णय लिया गया।

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17 अगस्त को टावी की प्रक्रिया पूरी की गई,अब मरीज स्वस्थ है। इसी प्रकार 69 वर्षीय पुरुष के छाती में दर्द के कारण भर्ती हुए इन्हें पहले (RHD) नामक बिमारी थी। इसके लिए इन्होंने 1992 में मित्राल वाल्व रिप्लेस करवाया था। विस्तृत जाँच पर दूसरे वाल्व में सिकुड़न का पता चला। चूंकि पहले वाल्व का ऑपरेशन हो चुका था इसलिए वापस ऑपरेशन करना जोखिम भरा था। इसलिए हृदय रोग टीम ने टावी को प्राथमिकता में रखी। 17 अगस्त को सफल टावी किया गया,अभी मरीज स्वस्थ है। इसी तरह देवड मोहनगढ़ जैसलमेर निवासी 61वर्षीय पुरुष के छाती में दर्द व श्वास में दिक्कत के कारण एमडीएम में भर्ती हुए। यह पूर्व में मधुमेह व मस्तिष्काघात से पीड़ित थे। इनकी विस्तृत जाँच में वाल्व में सिकुड़न का पता चला। इतनी अधिक बिमारीयां होने के कारण हृदय रोग टीम ने टावी का निर्णय लिया। 17 अगस्त को ही इनकी भी सफल टावी की गई, मरीज स्वस्थ है।

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